सनातन धर्म में नवरात्र का पर्व बेहद खास माना जाता है, जो भक्तों को न सिर्फ मां दुर्गा की आराधना करना सिखाता है, बल्कि यह पर्व व्यक्ति को सात्विक जीवन जीना भी सिखाता है। इस त्योहार के दौरान सभी भक्त तामसिक भोजन खाने से परहेज करते हैं। इसके बजाय आलू, साबूदाना और कद्दू से बने व्यंजन खाते हैं। यानी अब नवरात्रि की थाली में आलू, कद्दू और साबूदाना मुख्य हिस्सा बन गए हैं, जबकि इतिहास पर नजर डालें तो नवरात्रि की थाली में ये व्यंजन हमेशा से शामिल नहीं थे। इसकी वजह यह है कि आलू, कद्दू और साबूदाना भारत के मूल आहार नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग देशों से आए हैं और बदलती संस्कृति के साथ भारतीय खानपान का हिस्सा बन गए।
इस वक्त पूरे देश में नवरात्रि का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, जहां हर तरफ खुशियों का माहौल है। नवरात्र पर्व के दौरान सभी लोग तामसिक भोजन के बजाय सात्विक भोजन खाते हैं। सनातन धर्म को मानने वाले लोग खास तौर पर आलू, कद्दू और साबूदाना खाना पसंद करते हैं। ये व्यंजन भले ही अब भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गए हैं लेकिन पहले ऐसा नहीं था। आइए जानते हैं कि ये सब्दियां भारत में कब आए थे।
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विदेशी व्यंजन बने नवरात्र की थाली का हिस्सा
आलू
आलू आज के दौर में भारतीय भोजन की थाली का मुख्य व्यंजन बन गया है। यह सब्जी मूल रूप से भारत की नहीं है, बल्कि हजारों साल पहले दक्षिण अमेरिका में इसकी खेती की जाती थी। 17वीं सदी के आसपास डच और अंग्रेज व्यापारी आलू को भारत लेकर आए थे। फिर धीरे-धीरे भारत में भी आलू की खेती की जाने लगी। 19वीं सदी आते-आते यह सब्जी भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय बन गई। इसी वजह से अब आलू नवरात्र के दौरान भी खाया जाता है।
कद्दू
कद्दू एक ऐसी सब्जी है, जिसे नवरात्र के दिनों में लोग खाना पसंद करते हैं। कई घरों में लोग सेंधा नमक डालकर कद्दू की सब्जी पकाकर खाते हैं, जबकि कई घरों में कद्दू का हलवा बनाया जाता है। इस तरह कद्दू नवरात्र की थाली का मुख्य हिस्सा बन चुका है। कद्दू की उत्पत्ति मेक्सिको और मध्य अमेरिका में हुई थी, जहां से धीरे-धीरे यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया।
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साबूदाना
आज के दौर में साबूदाने की खीर, बड़ा और खिचड़ी बनाकर लोग खाते हैं। यह भोजन खास तौर पर नवरात्रि और शिवरात्रि जैसे पर्वों के दौरान खाना पसंद किया जाता है। यानी साबूदाना भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया है, लेकिन यह ब्राजील का है, जो बाद में भारत पहुंचा। जब लोगों की खानपान की आदतें बदलीं, तो विदेशों से आए ये सब्जी भी नवरात्रि की थाली का हिस्सा बन गए।