सनातन धर्म में सावन महीना बेहद खास माना जाता है। इस महीने में लोग भगवान शिव की आराधना करते हैं। साथ ही सावन के महीने सोमवार के दिन लोग पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे भक्तों को शिव जी का आशीर्वाद मिलता है। जहां एक ओर यह महीना शिव भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ लोग इस महीने शादी जैसे मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। हिन्दू धर्म के जानकारों का भी यही मानना है कि इस महीने व्यक्ति को शादी नहीं करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन महीने में चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। इसी वजह से व्यक्ति को इस महीने शादी जैसा शुभ काम नहीं करना चाहिए।
इस साल 30 जुलाई से सावन का महीना शुरू होगा, जो 28 अगस्त को खत्म होगा। इससे ठीक पहले चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू हो चुका है। चातुर्मास पूरे चार महीने तक रहता है। इस दौरान हिन्दू धर्म के लोग शादी नहीं करते हैं। अब सवाल उठता है कि सावन महीने में ही चातुर्मास क्यों पड़ता है? इस महीने में लोग शादी के अलावा और कौन-कौन से काम नहीं कर सकते हैं?
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सावन में नहीं होती शादी
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन महीना चातुर्मास के समय पड़ता है। कई धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस महीने भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, यानी वे चार महीने के लिए विश्राम करते हैं। इसी वजह से लोग इस महीने शादी नहीं करते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक कोई भी शादी तभी सम्पन्न मानी जाती है, जब भगवान विष्णु उस जोड़े को आशीर्वाद दें। इसलिए लोग इस महीने शादी जैसे शुभ कार्य करने से बचते हैं। अब सवाल उठता है कि चातुर्मास के समय शादी के अलावा कौन से काम वर्जित हैं?
चातुर्मास में क्या न करें?
1. इस महीने में भक्तों को शादी-विवाह के अलावा सगाई और मुंडन कराने से भी बचना चाहिए। साथ ही इस महीने में गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत करने से भी बचना चाहिए।
2. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने लोगों को तामसिक भोजन खाने से बचना चाहिए। इस वजह से लोगों को चातुर्मास में लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा का परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही लोगों को पत्तेदार सब्जियां और बैंगन, मूली जैसी कुछ सब्जियां खाने से भी बचना चाहिए।
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3. चातुर्मास में लोगों को घूमने नहीं जाना चाहिए। धार्मिक परंपरा के मुताबिक साधु-संत इस दौरान एक ही जगह रहकर तपस्या करते हैं। इसी वजह से माना जाता है कि लोगों को लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।