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सावन महीने का पहला सोमवार, शिव भगवान की पूजा की विधि और नियम जानिए

आज सावन का पहला सोमवार है। इस दिन न सिर्फ शिव भगवान की पूजा की जाती है। जानिए पूजा की सही विधि क्या है, साथ ही सोमवार के दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Sawan Month First Monday rituals

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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आज सावन महीने का पहला सोमवार है। यह दिन धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बेहद शुभ माना जाता है। सावन महीने के सोमवार के दिन लाखों शिवभक्त न सिर्फ भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं। इसके अलावा कई महिलाएं मंदिरों में कीर्तन करती नजर आती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भक्त सच्ची श्रद्धा से पूजा-पाठ करता है, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। भक्तों को पूजा करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

इस साल 3 अगस्त को सावन महीने का पहला सोमवार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त आज के दिन भोलेनाथ की विधिवत पूजा-पाठ करेगा, उस पर शिव भगवान की कृपा बरसेगी। अब सवाल उठता है कि आज पूजा की सही विधि क्या है? आइए जानते हैं।

 

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पूजा की विधि

 

1.सोमवार के दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठना चाहिए। इसके बाद विधिवत स्नान करके साफ कपड़े पहनें।

 

2.सुबह ही शिव मंदिर जाएं, जहां शिवलिंग पर सबसे पहले कच्चा दूध अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार जल अर्पित करने से भक्त के घर सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

 

3.जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन लगाएं और फूल चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सफेद फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते भगवान शिव को बेहद पसंद हैं। इसलिए भक्तों को ये फूल और पत्ते अर्पित करने चाहिए।

 

4.फूल चढ़ाने के बाद कोई भी मौसमी फल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए।

 

5.पूजा के अंत में आरती करें। यह आरती पूरे परिवार के साथ करनी चाहिए, जिसके बाद मंत्र जाप करना चाहिए।

 

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इन बातों का रखें ध्यान

सावन के सोमवार को कई भक्त व्रत रखते हैं। ऐसे लोगों को व्रत के एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन करना चाहिए। वहीं सावन के पूरे महीने तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।

 

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्तों को पूजा के दौरान केतकी का फूल और तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। साथ ही टूटे हुए बेलपत्र भी भगवान शिव को अर्पित नहीं करने चाहिए।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।


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