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14 या 15 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी षटतिला एकादशी, क्या है इसकी कथा?

माघ महीने में मनाई जाने वाली षटतिला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं साल 2026 में कब और किस दिन षटतिला एकादशी मनाई जाएगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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माघ माह की पवित्र एकादशी में आने वाली षटतिला एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में खास आस्था देखने को मिलती है। यह एकादशी न केवल व्रत और पूजा का पर्व है, बल्कि दान, तप और आत्मशुद्धि का भी महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और तिल से जुड़े धार्मिक कार्य करने से जीवन के पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। खास बात यह है कि षटतिला एकादशी माघ कृष्ण पक्ष में आती है, जिसे मोक्षदायिनी तिथि माना गया है।

 

देशभर के मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हवन और दान का आयोजन किया जाता है, वहीं भक्तजन व्रत रखकर भगवान नारायण की कृपा पाने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथा की वजह से यह एकादशी हर वर्ष आस्था और विश्वास का केंद्र बन जाती है।

 

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षटतिला एकादशी 2026 में कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी साल 2026 में माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाई जाएगी। इस तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 के दिन शाम 3 बजकर 17 मिनट से होगी और इसका समापन 14 जनवरी 2026 के दिन शाम को 5 बजकर 55 मिनट पर होगा। सनातन धर्म  के अनुसार, 14 जनवरी 2026 के दिन षटतिला एकादशी मनाई जाएगी। पारण का समय 15 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट के बीच बताया गया है। 

 

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षटतिला एकादशी की कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण स्त्री भगवान विष्णु की भक्त थी। वह नियमित रूप से व्रत और पूजा करती थी लेकिन दान में कभी अन्न या धन नहीं देती थी। मृत्यु के बाद जब वह वैकुंठ पहुंची, तो उसे वहां कष्ट मिलने लगे। तब भगवान विष्णु ने बताया कि दान न करने की वजह से उसे यह कष्ट भोगना पड़ रहा है। इसके समाधान के लिए भगवान ने उसे माघ कृष्ण एकादशी यानी षटतिला एकादशी का व्रत करने का विधान बताया। स्त्री ने इस व्रत को तिल के दान, तिल स्नान और तिल से जुड़ी विधियों के साथ किया, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। तभी से यह एकादशी तिल से जुड़े छह कार्यों की वजह से षटतिला कहलाने लगी।

षटतिला एकादशी की विशेषता

इस एकादशी की सबसे बड़ी विशेषता तिल का महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तिल से जुड़े छह कार्य करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, जिसमें तिल से स्नान, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन, तिल का दान, तिल का सेवन और तिल से बना भोजन करना बताया गया है।

 

ऐसा माना जाता है कि इन उपायों से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे धन, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। माघ माह स्वयं पुण्य का महीना माना जाता है और उसमें आने वाली यह एकादशी आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत फलदायी मानी गई है।

धार्मिक मान्यता

धर्मग्रंथों के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो जीवन में आर्थिक संकट, रोग या मानसिक अशांति से गुजर रहे हों।

 

इस प्रकार षटतिला एकादशी भक्ति, दान और आत्मशुद्धि का पर्व है, जो भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।


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