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स्नान, भोजन, हवन सब तिल से होगा, समझिए षटतिला एकादशी का महत्व

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास में पहला एकादशी व्रत षटतिला एकादशी के रूप में रखा जाएगा। आइए जानते हैं, षटतिला एकादशी की तिथि और महत्व।

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भगवान विष्णु। (Photo Credit: Creative Image)

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भगवान विष्णु की उपासना के लिए एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। बता दें कि एकादशी व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है, जिसमें पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन षटतिला एकादशी व्रत का पालन किया जाता है। 

 

षटतिला एकादशी व्रत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु और भगवान श्री कृष्ण को बहुत प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर पूजा - पाठ करने से और तिल का इस्तेमाल करने से व्यक्ति को विशेष लाभ प्राप्त होता है। आइए जानते हैं, कब रखा जाएगा षटतिला एकादशी व्रत और पूजा विधि।

षटतिला एकादशी 2025

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 24 जनवरी शाम 07 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 25 जनवरी रात्रि 08 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगा। 

 

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उदया तिथि के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत का पालन 25 जनवरी, शनिवार के दिन किया जाएगा। बता दें कि इस विशेष दिन पर ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है, जिसे पूजा पाठ के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

षटतिला एकादशी का महत्व

षटतिला एकादशी पर छह प्रकार से तिल का उपयोग किया जाता है, जिसमें- तिल स्नान, तिल भोजन, तिल का दान, तिल का लेप, तिल से हवन और तिल जल का पान, इसी वजह से इस दिन को षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि तिल का उपयोग शरीर को पवित्र करता है और पापों का नाश करता है। 

 

शास्त्रों में एकादशी व्रत के महत्व को विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करने और गरीबों को अन्न, वस्त्र और तिल दान करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। Khabargaon इसकी पुष्टि नहीं करता।


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