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सूतक काल न होने पर भी इस तरह पड़ता है सूर्य ग्रहण का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव सूतक काल के न होने पर भी पड़ सकता है, जानिए कैसे?

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सांकेतिक चित्र(Photo Credit: Canva Image)

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ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को बहुत ही महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं पर गिन जाता है। बता दें कि 29 मार्च को साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दर्शनीय नहीं होगा जिस वजह से यहां सूतक काल मान्य नहीं होता है।

 

कई लोग यह मानते हैं कि सूर्य ग्रहण या सूतक काल के दौरान ही ज्योतिषीय और आध्यात्मिक प्रभाव अधिक होता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल हो या न हो टैब भी अन्यग्रहों की चाल, नक्षत्र और अन्य खगोलीय घटनाओं का प्रभाव हमारी ऊर्जा, विचारधारा और जीवन पर पड़ता है।

 

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सूर्य ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार, हर ग्रह एक विशेष ऊर्जा और प्रभाव को दर्शाता है। भले ही ग्रहण न हो लेकिन यदि किसी ग्रह की स्थिति कमजोर या प्रतिकूल हो, तो व्यक्ति के जीवन पर इसका असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, शनि की साढ़े साती या मंगल की महादशा जीवन में संघर्ष बढ़ा सकती है।

 

हर दिन, चंद्रमा अलग-अलग नक्षत्रों से गुजरता है और ज्योतिश शास्त्र में बताया गया है कि इससे मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। कुछ विशेष योग, जैसे गजकेसरी योग, राजयोग या विष योग, भले ही ग्रहण न हो लेकिन किसी व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

 

ग्रहों की चाल समय-समय पर बदलती रहती है, जिसे गोचर कहा जाता है। यह हमारे व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, ज्योतिष विद्वान बताते हैं कि गुरु (बृहस्पति) का शुभ गोचर व्यक्ति के ज्ञान, करियर और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता करता है, जबकि राहु और केतु का गोचर भ्रम और चुनौतियाँ ला सकता है।

 

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सूर्य ग्रहण का आध्यात्मिक प्रभाव

भले ही सूतक काल न हो लेकिन ब्रह्मांड में हर पल ऊर्जा का प्रवाह जारी रहता है। कुछ विशेष दिन, जैसे पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती है, जिससे ध्यान, साधना और मंत्र जाप का अधिक प्रभाव पड़ता है।

 

पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश—इन पांच तत्वों का संतुलन हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी विशेष दिन, यदि पर्यावरण में किसी तत्व का असंतुलन होता है, तो यह हमारे स्वास्थ्य और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है।

 

कुछ दिन विशेष रूप से आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं, भले ही कोई खगोलीय घटना न हो। नियमित ध्यान, योग और भक्ति से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और आत्मिक शक्ति बढ़ती है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी ज्योतिष शास्त्र, सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।


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