सनातन धर्म में अग्नि को पांच तत्वों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अग्नि के स्पर्श से सब कुछ शुद्ध हो जाता है। इसी वजह से नए घर के गृह प्रवेश के दौरान हवन कराया जाता है, ताकि अग्निदेव के प्रभाव से घर शुद्ध हो जाए और वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहें। इन्हीं अग्निदेव को सच्ची गवाही देने की वजह से श्राप का सामना करना पड़ा था। उस श्राप से अग्निदेव इतने क्रोधित हुए कि धरती लोक ही छोड़कर चले गए।
पौराणिक कथा के मुताबिक, जब ऋषि भृगु अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए, तब उन्होंने अग्निदेव को श्राप दे दिया। इसी श्राप का प्रभाव आज भी अग्निदेव पर माना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि ऋषि भृगु को ब्रह्मा जी का पुत्र माना जाता है। अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी, जिसके कारण भृगु ऋषि ने अग्निदेव को श्राप दिया।
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अग्निदेव ने क्यों दी गवाही?
पौराणिक कथा के मुताबिक, ऋषि भृगु की पत्नी का नाम पुलोमा था, जो बेहद सुंदर थीं। दोनों पति-पत्नी सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे। एक दिन ऋषि भृगु संध्या के समय उपासना के लिए गंगा तट पर गए थे।
इसी दौरान पुलोम नाम का एक राक्षस साधु का वेश धारण कर ऋषि भृगु के घर पहुंच गया। ऋषि के वेश में आए उस व्यक्ति को पुलोमा ने अतिथि समझकर उसका आदर-सत्कार किया और भोजन कराया। राक्षस पुलोम, पुलोमा को देखकर मोहित हो गया। उसने मन ही मन उनका अपहरण करने की योजना बना ली। भोजन करने के बाद उसने पुलोमा से अपने साथ चलने के लिए कहा, लेकिन पुलोमा ने साफ इनकार कर दिया। तब राक्षस ने दावा किया कि बचपन में उसने पुलोमा को अपनी पत्नी मान लिया था। अपने इस दावे को साबित करने के लिए उसने अग्निदेव को गवाही देने के लिए कहे थे।
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अग्निदेव ने दी सच्ची गवाही
जब राक्षस ने अग्निदेव से सच्चाई पूछी, तो अग्निदेव ने बताया कि यह बात कुछ हद तक सही है। उन्होंने कहा कि एक समय पुलोमा के पिता ने राक्षस से यह वचन दिया था कि वे अपनी पुत्री का विवाह उससे करेंगे और उस समय अग्निदेव वहां मौजूद थे। हालांकि, वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पुलोमा के वास्तविक पति ऋषि भृगु ही थे।
अग्निदेव की यह गवाही सुनते ही राक्षस ने आव देखा न ताव और पुलोमा को जबरदस्ती अपने साथ ले जाने लगा। उस समय पुलोमा गर्भवती थीं। रास्ते में ही उनके पुत्र का जन्म हुआ। नवजात शिशु का तेज इतना प्रचंड था कि उसे देखकर राक्षस पुलोम डरकर भाग गया। बाद में जब ऋषि भृगु को पूरी घटना का पता चला, तो उन्होंने अग्निदेव को श्राप दे दिया।
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ऋषि भृगु ने अग्निदेव को दिया श्राप
ऋषि भृगु ने अग्निदेव को श्राप दिया कि अब से वे सर्वभक्षी कहलाएंगे, अर्थात अच्छी और बुरी हर वस्तु को ग्रहण करेंगे। इस श्राप को सुनकर अग्निदेव अत्यंत नाराज हो गए और धरती लोक छोड़कर चले गए।
इस समस्या को देखते हुए ब्रह्मा जी ने अग्निदेव को अपने पास बुलाया और उन्हें समझाया कि उनके बिना धरती लोक का संचालन संभव नहीं है। साथ ही, श्राप का प्रभाव कम करने के लिए ब्रह्मा जी ने अग्निदेव को वरदान दिया कि संसार में कोई भी शुभ कार्य, यज्ञ और हवन के बिना पूर्ण नहीं माना जाएगा।
नोट: इस लेख में दी गई कहानी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।