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जैन धर्म के नवकार मंत्र में छिपा है सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बनने का राज, जानें रहस्य

जैन धर्म में नवकार एक मंत्र है, जिसे सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस मंत्र के अर्थ को समझकर कोई भी व्यक्ति जैन धर्म का सार समझ सकता है। समझिए नवकार मंत्र का अर्थ क्या है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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कई धर्मों में मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि मंत्रों के उच्चारण से व्यक्ति के मन में एक पॉजिटिव ऊर्जा बनती है, जिससे व्यक्ति का मन और चेतना सकारात्मक महसूस कर पाते हैं। उसी प्रकार जैन धर्म में भी मंत्र जाप को महत्व दिया गया है। जैन धर्म में सबसे खास नवकार मंत्र को माना गया है। इस मंत्र का एक-एक शब्द जैन धर्म का मूल सार बताता है। जैन धर्म अहंकार रहित जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जहां साधना ही जीवन का परम मार्ग माना जाता है। नवकार मंत्र भी व्यक्ति को अहंकार से मुक्त होने की प्रेरणा देता है।

 

जैन धर्म की मान्यता के अनुसार, नवकार में न महावीर का नाम है, न ऋषियों का और न किसी देवता का नाम है। यानी इस मंत्र में व्यक्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति के गुणों को नमन किया गया है। यह हमें सीख देता है कि जहां गुण प्रकट हों, वहां नमस्कार करना चाहिए। अब सवाल उठता है कि नवकार मंत्र क्या है और इस मंत्र को जैन धर्म में सबसे खास क्यों माना गया है? आइए जानते हैं।

 

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क्या है नवकार मंत्र?

जैन धर्म की मान्यता के अनुसार, एक व्यक्ति अपने गुणों से महान बनता है। जब व्यक्ति में केवल अवगुण बस जाएं, तो व्यक्ति अपना ही विनाश कर बैठता है। इसी विनाश से बचने के लिए जैन धर्म की मूल मान्यता कहती है कि जब भी किसी व्यक्ति से कुछ अच्छा सीखने को मिले, तब हमें वे गुण तुरंत सीख लेने चाहिए। इससे व्यक्ति खुद को बेहतर बना सकता है।

उसी प्रकार नवकार मंत्र में पांच ऐसे गुणों को नमन किया गया है, जिनसे व्यक्ति और बेहतर बन सकता है।

 

इसके अलावा नवकार मंत्र की सबसे खास बात यह है कि इसके जाप के जरिए व्यक्ति कुछ मांगता नहीं है। इसके बजाय गुणों को नमस्कार किया गया है, ताकि व्यक्ति का अहंकार खत्म हो और उसमें अच्छे गुणों की प्राप्ति हो।

 

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'नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं, नमो आयरियाणं, नमो उवज्झायाणं, नमो लोए सव्व साहूणं। एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं।'

 

इस मंत्र का अर्थ है कि मैं उन अरिहंतों को नमन करता हूं, जिन्होंने सभी दोषों का नाश किया। मैं उन सिद्धों को नमन करता हूं, जिन्होंने अंतिम मुक्ति हासिल की। मैं उन आचार्यों को नमन करता हूं, जो मोक्ष की राह दिखाते हैं। मैं उन उपाध्यायों को नमन करता हूं, जिन्होंने शास्त्रों का ज्ञान दिया। मैं सभी साधु-साध्वियों को नमन करता हूं।

नवकार मंत्र की खास सीख

नवकार मंत्र के जरिए व्यक्ति को सीख मिलती है कि व्यक्ति को दूसरों के गुणों को नमन करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए, बल्कि गुणी व्यक्ति के गुणों को झुककर सीख लेना चाहिए।

मंत्र का पहला पद सिखाता है कि जिस व्यक्ति ने अपने दुश्मनों पर विजय पा ली है, उसे नमन करें। आज के दौर में व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन उसके मन के भाव हैं। जो व्यक्ति अपने मन पर विजय पा ले, वही श्रेष्ठ बन सकता है। तो पहले पद के जरिए बताया गया है कि व्यक्ति को अपने मन पर विजय पाना सीखना चाहिए।

 

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मंत्र के दूसरे पद में बताया गया है कि जिस व्यक्ति ने सांसारिक कर्म बंधन से मुक्ति पा ली है, हमें उनसे सीखना चाहिए। जो लोग शास्त्रों का ज्ञान देते हैं, उनका नमन करना चाहिए, ताकि व्यक्ति को ज्ञान मिल सके। मंत्र के आखिरी में बताया गया है कि जो साधु-साध्वी हैं, उनके गुण जैसे अहिंसा और ब्रह्मचर्य सीखने चाहिए।

 

नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

 

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