ईसाई धर्म में क्रॉस को बेहद खास माना जाता है। लोगों की मान्यता है कि क्रॉस ईसाई धर्म का प्रतीक है। यह चिन्ह सिर्फ धार्मिक नजरिए से ही अहम नहीं है, बल्कि इस चिन्ह का जुड़ाव रोमन साम्राज्य से भी है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, जब रोमन साम्राज्य में ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाने का दंड दिया गया था, उसके बाद से क्रॉस ईसा मसीह के त्याग, बलिदान और पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया।
आज के दौर में कई लोग क्रॉस को अपने गले में माला के तौर पर पहनते हैं, जिससे लोग ईसा मसीह की अलौकिक शक्तियों और बलिदान को याद कर पाते हैं। ईसाई धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ बाइबल माना जाता है। इसी बाइबल में क्रॉस के बारे में कई अहम बातें बताई गई हैं। अब सवाल उठता है कि बाइबल में क्रॉस के बारे में क्या लिखा है? आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।
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कैसे बना आस्था का प्रमुख प्रतीक?
बाइबल में सीधे तौर पर बताया गया है कि क्रॉस ईसा मसीह की मृत्यु और बलिदान का प्रतीक है। ईसाई धर्म में माना जाता है कि जब ईसा मसीह को मृत्युदंड दिया गया था, तो यह केवल एक घटना नहीं थी। यह घटना मानवता के पापों के प्रायश्चित का प्रतीक है। इसी वजह से क्रॉस को विश्वास का केंद्र माना जाता है।
ईसाई धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब ईसा मसीह ने बलिदान दिया, तब उन्होंने लोगों के लिए गर्व से मुस्कराकर अपना बलिदान दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब रोमन सरकार ने ईसा मसीह को मृत्यु की सजा सुनाई थी, तब ईसा मसीह को क्रॉस के आकार की सूली पर चढ़ाया गया था। तभी से क्रॉस का चिन्ह बुराई पर विजय का संकेत बन गया। इसी वजह से ईसाई धर्म में प्रार्थना करते समय क्रॉस का चिन्ह बनाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
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यह चिन्ह ईसा मसीह के पुनरुत्थान से भी जुड़ा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह ने बलिदान के लगभग 3 दिनों बाद पुनरुत्थान किया था। इस वजह से क्रॉस चिन्ह को आस्था का प्रतीक माना जाता है।
कितने प्रकार के होते हैं क्रॉस?
ईसाई धर्म में अलग-अलग प्रकार के क्रॉस के चिन्ह लोग पहनते हैं, जिनका अर्थ अलग-अलग होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 4 ऐसे क्रॉस के चिन्ह हैं, जिनका डिजाइन और महत्व अलग-अलग होता है। हालांकि, ईसाई धर्म में कुल 12 प्रकार के क्रॉस चिन्ह होते हैं, जिनके अर्थ अलग-अलग हैं।
1. टाऊ क्रॉस-यह चिन्ह टी आकार का होता है। कई धार्मिक विद्वानों का मानना है कि जब ईसा मसीह सूली पर चढ़े थे, तो वह टी आकार की थी। इसी वजह से शुरुआत में विद्वानों ने टी आकार का क्रॉस चिन्ह अपनाया था। इस चिन्ह को मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।
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2. अंख क्रॉस- यह शब्द मिस्र की चित्रलिपि से लिया गया है। अंख क्रॉस जीवन का प्रतीक माना जाता है। मिस्र में अंख चिन्ह देवताओं के हाथ में देखा जाता है।
3. शांति क्रॉस- इस क्रॉस को ईसाई धर्म ने बेहद पहले ही अपनाया गया था। इस क्रॉस में ओमेगा और अल्फा लिखा होता है, जो ग्रीक वर्णमाला के आखिरी शब्द हैं।
4. क्लासिक ईसाई क्रॉस- धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वास्तव में ईसा मसीह के सूली पर चढ़ने का प्रतीक है। इस क्रॉस का डिजाइन सूली पर चढ़ने वाली घटना को दिखाता है।