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क्या है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की कथा? जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

सितंबर महीने के पहले हफ्ते में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस दौरान लाखों भक्त व्रत रखेंगे। तो जन्माष्टमी मनाने से पहले जानिए जन्माष्टमी की व्रत कथा क्या है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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जन्माष्टमी का त्योहार मनाने के लिए लाखों भक्तों ने तैयारी शुरू कर दी है। इस पर्व का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। इस साल 4 सितंबर को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा, जब लाखों लोग न सिर्फ भजन-कीर्तन करेंगे, बल्कि पूरे दिन व्रत भी रखेंगे। साथ ही 4 सितंबर की आधी रात को भजन-कीर्तन और पूजा-आरती की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्तों को व्रत रखने के साथ-साथ जन्माष्टमी से जुड़ी कथा भी सुननी चाहिए, जिसके प्रभाव से भक्तों को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि मिलती है।

 

इस शुक्रवार के दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। उससे ठीक पहले लाखों भक्तों ने बाल कृष्ण स्वरूप के लिए कपड़े, माला और झूला खरीदना शुरू कर दिया है। धार्मिक ग्रंथों में जन्माष्टमी में व्रत रखने को खास अहमियत दी गई है। इसी लिए लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि वे जन्माष्टमी के दिन व्रत रखें।

 

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जन्माष्टमी की कथा

स्कंद पुराण के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा में एक राजा थे, जिनका एक बेटा कंस और बेटी देवकी थी। कंस ने अपने पिता की गद्दी छीन ली थी और खुद राजा बन गया। कंस ने अपनी बहन की शादी यदुवंश के राजा वासुदेव के साथ कराई थी। जब कंस खुद अपनी बहन को विदा कर रहे थे, तो आकाशवाणी हुई, जिसमें कहा गया, 'कंस, जिस बहन को तुम प्रेम से विदा कर रहे हो, उसी बहन का आठवां पुत्र तुम्हारी मौत की वजह बनेगा।'

 

मौत के डर की वजह से कंस और यदुवंशी वासुदेव के बीच युद्ध की स्थिति बन गई थी, लेकिन वासुदेव युद्ध नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने वादा किया कि जब आठवां पुत्र पैदा होगा, तो उसे कंस को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद कंस ने देवकी और वासुदेव को जेल में बंद कर दिया। देवकी के पहले 7 पुत्रों को कंस ने मार दिया। इसके बाद भादो के महीने में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उसी दौरान यशोदा ने एक पुत्री को जन्म दिया। वासुदेव को भगवान विष्णु ने सलाह दी कि वे अपने आठवें पुत्र को यशोदा के घर छोड़ आएं। यह सलाह मानकर वासुदेव आधी रात को यशोदा के घर बाल कृष्ण को छोड़ आए और उनकी बेटी को अपने साथ जेल ले गए। जब कंस को पता चला कि देवकी ने बेटी को जन्म दिया है, तो उसने कन्या का वध करने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहा। इसके बाद जब श्रीकृष्ण बड़े हुए तो उन्होंने कंस का वध किया।

 

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 क्या करें?

व्रत रखें- धार्मिक जानकारों के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन लोगों को व्रत रखना चाहिए। निर्जला व्रत को सबसे बेहतर माना जाता है। हालांकि, जो लोग व्रत नहीं रख सकते हैं, उन लोगों को फलाहार व्रत रखना चाहिए।

मंत्र जाप- इस दिन सभी भक्तों को श्रीकृष्ण का मंत्र जाप करना चाहिए, जिससे भक्तों को भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।

पीले कपड़े पहनाएं- इस साल जन्माष्टमी के दिन लोगों को कान्हा जी को पीले कपड़े पहनाने चाहिए।

दान करें- सभी भक्तों को जरूरतमंद लोगों को अन्न और रुपये का दान देना चाहिए।

क्या न करें?

न करें अपमान- इस दिन लोगों को दूसरों के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल या दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए।

तामसिक भोजन से परहेज- जिन लोगों ने व्रत रखना है, उन्हें एक रात पहले ही तामसिक भोजन खाने से बचना चाहिए।

 

नोट: यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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