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कौन हैं देवी महागौरी, अवतार की कथा से मान्यता तक, सब जानिए

देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप देवी महागौरी की पूजा नवरात्रि के आठवें दिन होती है। आइए जानते हैं कि कैसे महागौरी का अवतार हुआ था?

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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नवरात्रि का आठवां दिन देवी दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना के लिए बहुत पावन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को पति स्वरूप प्राप्त करने के लिए जब देवी पार्वती ने कठोर तपस्या की, तो उनका शरीर तप की वजह से काला और दुर्बल हो गया। उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें गंगा जल से स्नान कराया। स्नान के बाद उनका रंग बहुत गोरा, उज्ज्वल और अलौकिक हो गया और इसी रूप में वह महागौरी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।

 

पुराणों के अनुसार, देवी महागौरी का पूजन जीवन के संकटों को दूर करता है और साधक को सुख, समृद्धि और मनोवांछित फल प्रदान करता है। विवाह योग्य कन्याओं के लिए महागौरी की विशेष कृपा मानी जाती है, कहा जाता है कि उनकी पूजा से जल्दी विवाह के योग बनते हैं। नवरात्रि के इस दिन भक्त सफेद कपड़ा पहनकर, फूल, दीपक और नैवेद्य से मां महागौरी की आराधना करते हैं। देवी महागौरी को शांति, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री माना जाता है और उनकी कृपा से साधक के जीवन से नकारात्मकता दूर होकर सुख-शांति का संचार होता है।

 

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देवी महागौरी का अवतार कैसे हुआ ?

देवी के अवतार की प्रचलित कथा के अनुसार, जब पार्वती जी भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर कठोर तप कर रही थीं, तो वे कई वर्षों तक जंगल में रही और व्रत-उपवास से उनका शरीर काला पड़ गया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया और गंगा में स्नान कराया। स्नान के बाद उनका रूप बहुत उज्ज्वल और गोरे रंग का हो गया। इसी वजह से वह महागौरी नाम से विख्यात हुईं। 

महागौरी से जुड़ी मान्यता

  • मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से मन की शांति, वैवाहिक सुख और जीवन से सभी कष्टों का निवारण होता है।
  • विवाह योग्य कन्याओं के लिए मां महागौरी की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।
  • भक्तों का विश्वास है कि माता महागौरी की कृपा से व्यक्ति का जीवन पवित्र और समृद्ध बनता है।

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महागौरी की पूजा का महत्व

  • नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है।
  • पूजा करने से भक्त को जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन भक्त उपवास रखकर, फूल, धूप, दीप और सफेद कपड़ा पहनकर देवी की पूजा करते हैं।
  • देवी को सफेद रंग बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद फुल और नारियल का भोग लगाया जाता है।

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