सनातन धर्म में सिर्फ भगवान की पूजा नहीं की जाती है, बल्कि कुछ खास तिथियों के दौरान अपने घर के पूर्वजों को भी याद किया जाता है। इस दौरान व्यक्ति अपने पितरों को याद करता है। साथ ही पितरों की याद में कुछ खास परंपराएं निभाई जाती हैं। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने परिवार के पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करने की परंपरा निभाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष की परंपरा सभी लोगों को नहीं निभानी चाहिए।
इस साल 27 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी, जिसका अंत अक्टूबर महीने की 10 तारीख को होगा। इस दौरान लोगों को अपने पितरों को याद करना चाहिए। साथ ही कुत्ते, चींटी, गाय, कौए और देवताओं के लिए भोजन रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान परंपराएं निभाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद मिलता है। अब सवाल उठता है कि किन लोगों को पितृ पक्ष के दौरान परंपरा निभानी चाहिए और किन लोगों को यह परंपरा नहीं निभानी चाहिए? आइए जानते हैं।
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पितृ पक्ष में क्या होता है?
धार्मिक ग्रंथ गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान लोगों को अपने घर के दरवाजे के सामने पानी का छिड़काव करना चाहिए, जिससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्यक्ति को पितृ पक्ष के दौरान चींटी, कौआ, गाय और कुत्तों को हर दिन भोजन खिलाना चाहिए।
इसके अलावा धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्यक्ति को पितृ पक्ष के दौरान सिर्फ अपने पितरों को याद करना चाहिए। इसके बजाय कुछ चीजें खरीदने से बचना चाहिए। धार्मिक जानकारों के अनुसार, व्यक्ति को नई गाड़ी, कपड़े, गहने, झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन वस्तुओं को खरीदने से व्यक्ति के पितर नाराज हो सकते हैं।
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किन्हें निभानी है यह परंपरा और किन्हें नहीं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष की परंपरा उन्हीं लोगों को निभानी चाहिए, जिनके पूर्वजों का निधन हो चुका है। यानी जिनके माता-पिता जीवित हैं, उन्हें यह परंपरा नहीं निभानी चाहिए। जिन लोगों के माता-पिता नहीं हैं, उनके बड़े पुत्र को तर्पण और श्राद्ध की परंपरा निभानी चाहिए। अगर परिवार में केवल बेटियां हैं, तो गरुड़ पुराण के अनुसार पुत्री भी पिता का श्राद्ध कर सकती है। जिन लोगों के माता-पिता जीवित हैं, उन्हें न ही पितृ पक्ष की परंपरा निभानी चाहिए और न ही पितृ पक्ष के नियम निभाने की जरूरत है।