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12 महीनों में कार्तिक को ही क्यों मानते हैं मोक्षदायी? स्कंद पुराण से समझें वजह

सनातन धर्म में कार्तिक को सबसे श्रेष्ठ महीना माना जाता है। यह भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय महीना है। इसके साथ ही, हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, यह महीना व्यक्ति के लिए मोक्षदायी होता है।

Kartika Month

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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हिंदू धर्म में कार्तिक सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने को सात्विक जीवन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान तुलसी पूजन, दीपदान और गंगा स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। यह महीना खास तौर पर भगवान कृष्ण का प्रिय महीना है। इस वजह से कार्तिक महीने में भगवान कृष्ण की आराधना करने की खास मान्यता है। इसी वजह से माना जाता है कि इस महीने में पुण्य कर्म करने से दोगुना-तिगुना फल मिलता है। इसके साथ ही, माना जाता है कि कार्तिक महीने में किए गए पुण्य कर्मों की वजह से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है।

 

इस साल 27 अक्टूबर से लेकर 24 नवंबर तक कार्तिक का पावन महीना रहेगा। इस महीने में एक तरफ सात्विक जीवन जीने और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है, वहीं दूसरी तरफ कार्तिक महीने में धनतेरस से लेकर दिवाली तक उत्सव मनाए जाएंगे, जब सभी भक्त उत्सव मनाते नजर आएंगे। अब सवाल उठता है कि कार्तिक महीने में पुण्य कर्म करने से ही व्यक्ति को मोक्ष क्यों मिलता है? इस सवाल का जवाब आइए धर्मग्रंथ स्कंद पुराण से समझते हैं।

 

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कार्तिक महीना क्यों है खास?

स्कंद पुराण में बताया गया है कि जिस प्रकार सभी युगों में सतयुग श्रेष्ठ है, नदियों में सबसे पवित्र नदी गंगा है और वेदों में सबसे श्रेष्ठ सामवेद है, उसी प्रकार 12 महीनों में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक महीना है। यह महीना भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय महीना है। इसी वजह से धर्मग्रंथ में कहा गया है कि कार्तिक महीने में किए गए दान-पुण्य से लोगों को दोगुना फल प्राप्त होता है और व्यक्ति की संयम की क्षमता बढ़ती है। इस महीने के महत्व को बताते हुए स्कंद पुराण में एक श्लोक लिखा है।

 

न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगम्।
न वेदसदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्॥

 

इस श्लोक का अर्थ है कि कार्तिक के समान कोई दूसरा महीना नहीं है। जिस प्रकार युगों में सतयुग के समान कोई दूसरा युग नहीं है, वेदों में सामवेद श्रेष्ठ है और गंगा के समान कोई दूसरी नदी नहीं है, उसी प्रकार कार्तिक के समान कोई दूसरा महीना नहीं है।

 

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कार्तिक महीना मोक्षदायी क्यों है?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक महीने में ही भगवान विष्णु नींद से जागते हैं। ऐसा माना जाता है कि वे धरती की नदियों में नारायण स्वरूप में विराजमान होते हैं। इसलिए माना जाता है कि ब्रह्म मुहूर्त में नदियों में स्नान और दीपदान करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति की हर मनोकामना सीधे देवताओं तक पहुंचती है। साथ ही, पुण्य कर्मों की वजह से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, माना जाता है कि इसी महीने भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जी ने असुर तारकासुर का वध किया था। इसी वजह से इस महीने का नाम कार्तिक है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

 

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