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एशियन गेम्स: भारत के मेडल की उम्मीदों को लगा झटका, रेसलर दीपक डोपिंग में फंसे

एशियन गेम्स से पहले भारत की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ग्रीको रोमन रेसलर दीपक डोपिंग में फंस गए हैं। उनका डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है, जिसके चलते वह आइची-नागोया में होने वाले एशियाड से बाहर हो गए हैं।

Wrestler Dope Test Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियन गेम्स से पहले भारतीय रेसलिंग को एक और झटका लगा है। ग्रीको रोमन रेसलर दीपक डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ क्लोमीफीन के सेवन के दोषी पाए गए हैं, जिससे भारत के एक और मेडल की उम्मीद खत्म हो गई है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने दीपक का नाम टीम से हटा दिया है। 

 

भारत ने एशियाड में उनका बर्थ भी गंवा दिया है। अब रेसलिंग में भारत की चुनौती और कमजोर हो गई है। भारत पहले ही डोपिंग मामलों के कारण एशियन गेम्स में रेसलिंग में दो बर्थ खो चुका था। फ्रीस्टाइल 86 किग्रा वर्ग के मुकुल दहिया और ग्रीको रोमन 130 किग्रा वर्ग के दीपांशु के खिलाफ डोपिंग मामले सामने आए थे।

 

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ट्रायल में दीपक ने हासिल की थी अप्रत्याशित जीत

दीपक भारतीय डाक सेवा से एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने वाले पहले रेसलर थे। दिल्ली के इस 25 वर्षीय रेसलर ने 31 मई को लखनऊ में हुए चयन ट्रायल में अप्रत्याशित जीत दर्ज कर टीम में जगह बनाई थी। इससे पहले उन्होंने फेडरेशन कप में मेडल जीतकर प्रभावित किया था। नेशनल डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार चयन ट्रायल के दौरान लिए गए दीपक के यूरीन के नमूने में क्लोमीफीन की मौजूदगी पाई गई। 

 

क्लोमीफीन 2026 की वर्ल्ड डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) की प्रतिबंधित सूची में S4 (हार्मोन और मेटाबोलिक मॉड्यूलेटर्स) श्रेणी में प्रतिबंधित पदार्थ है। नाडा ने बताया कि नमूने में 23 जुलाई को असामान्य निष्कर्ष सामने आया। इसके बाद जांच और 17 अगस्त को रेसलर के साथ साक्षात्कार के बाद मामले को प्रतिकूल विश्लेषणात्मक निष्कर्ष (AAF) के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। बता दें कि क्लोमीफीन का इस्तेमाल आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं में बांझपन के इलाज के लिए किया जाता है।

 

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अभी निलंबित नहीं किए गए हैं दीपक

नाडा की अधिसूचना में यह नहीं कहा गया है कि दीपक को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मामले के निपटारे तक उन पर अस्थायी निलंबन नहीं लगाया गया है और वह प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं जब तक कि बाद में उन पर निलंबन नहीं लगाया जाता। हालांकि अधिसूचना में कहा गया है कि यदि डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन (NDRV) की पुष्टि होती है, तो 31 मई 2026 यानी नमूना लिए जाने की तारीख से लेकर किसी भी अस्थायी निलंबन की शुरुआत तक हासिल किए गए परिणामों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

 

अगर बी नमूने में क्लोमीफीन की मौजूदगी की पुष्टि होती है या दीपक बी नमूने की जांच कराने से इनकार करते हैं तो लागू डोपिंग रोधी नियमों के तहत NDRV की पुष्टि हो जाएगी। WFI के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि फेडरेशन दीपक को टीम से हटा रहा है, क्योंकि अगर एशियाड के दौरान उनका नमूना फिर से पॉजिटिव आता है तो वर्ल्ड रेसलिंग की संचालन संस्था UWW, WFI पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगा सकती है।

 

अधिकारी ने कहा, 'दीपक ने ट्रायल जीतकर कोच को वाकई हैरान किया था। वह कभी नेशनल कैंप का हिस्सा नहीं रहे, इसलिए उनका पर्याप्त परीक्षण भी नहीं हुआ। उन्होंने फेडरेशन कप में मेडल जीतने के बाद ट्रायल के जरिए टीम में जगह बनाई।' उन्होंने आगे कहा, 'हम उन्हें टीम से हटा रहे हैं।' WFI का कहना है कि अगर उसे प्रतिकूल डोपिंग नतीजों की जानकारी समय पर मिल जाती तो वह तीनों कोटा स्थान बचा सकता था।

जुलाई में नतीजे आने से भारत ने खोया बर्थ

अधिकारी ने बताया, 'दीपांशु का टेस्ट मार्च में हुआ था और हमें उसका नतीजा जुलाई में मिला। इसी तरह मुकुल और दीपक के नमूने 31 मई को लिए गए और हमें उनके नतीजे अब मिल रहे हैं। अगर हमें नतीजों की जानकारी पहले मिल जाती तो हम उनके नाम नहीं भेजते। हम उनकी जगह दूसरे रेसलर्स को भेज सकते थे लेकिन अब कुछ नहीं किया जा सकता।' रेसलर को 'ए' नमूने के नतीजे को चुनौती देने का अधिकार है। इसके लिए वह बी नमूने की जांच का अनुरोध कर सकते हैं। नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर उन्हें इस अधिकार इस्तेमाल करना होगा।


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