जापान के आइची-नागोया में हो रहे एशियन गेम्स 2026 में बुधवार (30 सितंबर) से रेसलिंग की प्रतियोगिता शुरू हो रही है। इसमें सुजीत कलकल, अंतिम पंघाल और अमन सहरावत से भारत को मेडल की काफी उम्मीदें हैं लेकिन इन्हें मुश्किल ड्रॉ मिला है, जिसके कारण तीनों पहलवानों के लिए मेडल की राह चुनौतीपूर्ण होगी। रेसलिंग प्रतियोगिता में प्रत्येक भार वर्ग के मुकाबले एक ही दिन होंगे। यानी क्वालिफिकेशन, सेमीफाइनल और मेडल मुकाबले उसी दिन आयोजित किए जाएंगे।
23 साल के सुजीत 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत के सबसे शानदार फॉर्म वाले पहलवान के रूप में जापान पहुंचे हैं। अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियन सुजीत ने 2026 में एशियन चैंपियनशिप के अलावा जाग्रेब ओपन और मुहामेत मालो रैंकिंग सीरीज में गोल्ड मेडल जीते हैं। वह जापान के ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका के ड्रॉ के उसी हिस्से में हैं। संभावित क्वार्टर-फाइनल में उनका सामना ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेह से और सेमीफाइनल में कियोका से हो सकता है, बशर्ते ये दोनों पहलवान अपने शुरुआती मुकाबले जीतें।
पिछले एक साल में सुजीत ने इस भार वर्ग के टॉप पहलवानों में अपनी जगह बनाई है लेकिन कियोका को अपने घरेलू मैदान पर खेलने का अतिरिक्त फायदा मिलेगा। सुजीत की गति और आक्रामक शैली की परीक्षा उस पहलवान के खिलाफ होगी, जिसने बड़े फाइनल के दबाव को झेलने की क्षमता पहले ही साबित की है।
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अंतिम पंघाल फिर जीतेंगी मेडल?
अंतिम पंघाल आत्मविश्वास के साथ महिला 53 किग्रा वर्ग में चुनौती पेश करेंगी। 22 वर्षीय अंतिम हांगझोऊ एशियन गेम्स की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और दो बार की वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट हैं। इस सीजन में उन्होंने सीनियर UWW प्रतियोगिताओं में छह जीत और दो हार दर्ज की है। अंतिम के ड्रॉ में चीन की झांग जिन उनके हिस्से में हैं और दोनों के बीच संभावित सेमीफाइनल मुकाबला हो सकता है। दोनों पहले दो बार आमने-सामने हो चुकी हैं और अंतिम ने दोनों करीबी मुकाबले जीते हैं।
जापान की मोए कियोका और उत्तर कोरिया की चो ह्यो ग्योंग ड्रॉ के दूसरे हिस्से में हैं। पिछले ओलंपिक चक्र के दौरान उतार-चढ़ाव भरे दौर के बाद अंतिम के पास खुद को फिर स्थापित करने का एक और मौका है। उन्होंने 53 किग्रा के नेशनल सेलेक्शन ट्रायल्स के फाइनल में मीनाक्षी गोयत को हराकर भारतीय टीम में जगह बनाई।
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अमन के सामने भी कठिन ड्रॉ
ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट अमन सहरावत के सामने भी कठिन ड्रॉ है। वह 57 किग्रा में ओलंपिक मेडलिस्ट के रूप में एशियन गेम्स में लौट रहे हैं। शुरुआती दौर में उनका सामना उज्बेकिस्तान के ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट गुलोमजोन अब्दुल्लाएव या जापान के यामातो ओगावा से हो सकता है। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान के नूरदानत एतानोव और संभावित सेमीफाइनल में ईरान के अली मोमेनी से मुकाबला हो सकता है। इसलिए अमन का शुरुआती मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण होगा। एक कठिन शुरुआत उन्हें तुरंत दबाव वाले मुकाबले में डाल देगी, खासकर ऐसे प्रारूप में जहां पूरा भार वर्ग एक ही दिन में पूरा होना है।
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बाकी पहलावानों का कैसा ड्रॉ है?
अन्य भारतीय पहलवानों में मेंस फ्रीस्टाइल में सागर जगलान के सामने 74 किग्रा में शुरुआती दौर में मौजूदा एशियन चैंपियन मंगोलिया के तुल्गा तुमुर ओचिर की चुनौती है। दीपक पूनिया का 97 किग्रा में शुरुआती मुकाबला चीन के झोउ जुनपेंग से है तो वहीं 125 किग्रा में रजत रुहाल भारतीय फ्रीस्टाइल टीम को पूरा करेंगे।
विमेंस टीम में निशा दहिया, मनीषा भनवाला, मानसी अहलावत, प्रिया मलिक और डेब्यूटंट दीपांशी शामिल हैं। निशा का 68 किग्रा में शुरुआती मुकाबला उत्तर कोरिया की पाक सोल गुम से होगा। 50 किग्रा में डेब्यू कर रहीं दीपांशी के सामने शुरुआती दौर में जापान की पूर्व वर्ल्ड और ओलंपिक चैंपियन यूई सुसाकी की चुनौती है। सुसाकी अपने करियर में केवल एक मुकाबला हारी हैं और वह हार पेरिस ओलंपिक में भारत की विनेश फोगाट के खिलाफ आई थी।
ग्रीको-रोमन में सुनील कुमार और नितेश सिवाच भारत की प्रमुख मेडल उम्मीदों में शामिल हैं। हांगझोऊ में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले सुनील के संभावित सेमीफाइनल में जापान के ताइजो योशिदा से मुकाबला हो सकता है। नितेश के ड्रॉ में तुर्कमेनिस्तान के अमानबेर्दी अगामामेदोव और मंगोलिया के गनखुयाग गनबातार जैसे पहलवान हैं। भारत ने 2022 एशियन गेम्स में कुश्ती में 6 मेडल जीते थे, जिनमें एक सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज शामिल थे।