भारतीय पैरा तैराकों ने आइची-नागोया गेम्स में अपना अभियान कुल 11 मेडल के साथ समाप्त किया। पिछले चरण में मिले एकमात्र ब्रॉन्ज मेडल की तुलना में यह बड़ा सुधार है। भारतीय तैराकों ने इस बार 3 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल जीते।
हिमांशु नंदल ने शुक्रवार (23 अक्टूबर) को ब्रॉन्ज दिलाया, जिससे तैराकी में भारत के मेडल की संख्या 11 तक पहुंच गया। हिमांशु और रवि बुडिगिना 3-3 मेडल जीतकर भारतीय तैराकी दल के अभियान को सफल बनाया।
'ऑप्टिक नर्व' में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने मेंस 100 मीटर फ्रीस्टाइल S11 स्पर्धा को एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी कर ब्रॉन्ज मेडल की हैट्रिक भी पूरी की। जापान के उचु तोमिता ने 58.22 सेकंड के समय के साथ गेम्स का नया रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता, जबकि चीन के चुआनझेन सुन ने 58.70 सेकंड में रजत मेडल हासिल किया।
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बुडिगिना ने इन स्पर्धाओं में जीते सिल्वर
बुडिगिना ने मेंस S13 वर्ग में 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में सिल्वर मेडल जीते। इसके बाद उन्होंने 50 मीटर फ्रीस्टाइल में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। हिमांशु इससे पहले मेंस 400 मीटर फ्रीस्टाइल और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक S11 स्पर्धाओं में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। इन गेम्स में 3 मेडल जीतने के साथ ही वह हमवतन रवि बुडिगिना की बराबरी पर पहुंच गए, जिन्होंने 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज सहित कुल 3 मेडल जीते हैं।
हिमांशु ने मंगलवार को मेंस 400 मीटर फ्रीस्टाइल S11 स्पर्धा में 5 मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने मेडल का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक S11 में ब्रॉन्ज जीता और शुक्रवार को तीसरा मेडल हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की। S11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता।
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रोहतक से आते हैं हिमांशु
हरियाणा के रोहतक में खेलों के माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े हिमांशु के पिता नेशनल लेवल पर हॉकी खेल चुके हैं। 4 साल की उम्र में वह दिल्ली आ गए और नेशनल दृष्टिबाधित संघ से जुड़े और ब्रेल लिपि सीखी। शुरुआत में उन्होंने जूडो में अपनी पहचान बनाई और नेशनल लेवल पर मेडल भी जीते। उन्होंने 2021 में तैराकी को अपना नया लक्ष्य बनाया। तैराकी में उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। 2024 में हिमांशु पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले भारत के पहले दृष्टिहीन तैराक बने।
दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हिमांशु ने इंटरनेशनल लेवल पर भी लगातार प्रगति की है। 2025 में सिंगापुर में आयोजित वर्ल्ड पैरा तैराकी चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्पर्धाओं के फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।