IPL पर मंडरा रहा हनी ट्रैप का खतरा! BCCI ने टीमों को क्यों आगाह किया?
IPL में हनी ट्रैप की आशंका जताते हुए BCCI ने सभी टीमों को निर्देश दिया है कि किसी भी खिलाड़ी के कमरे में कोई बाहरी शख्स नहीं जा सकता है। टीम के मालिकों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT
इंडियन प्रीमियर लीग ( IPL ) का यह सीजन अब रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। 6 से 7 टीमों के बीच प्ले ऑफ्स में जगह बनाने की जंग शुरू हो गई है। इसी बीच हनी ट्रैप का खतरा भी मंडराने लगा है। यही वजह है कि खिलाड़ियों के होटल कमरों में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी को लेकर बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) ने सभी टीमों को आगाह किया है। BCCI ने खिलाड़ियों और अन्य स्टाफ को हनी ट्रैप में फंसाए जाने की आशंका जाहिर की है और कहा है कि किसी भी खिलाड़ी या स्टाफ के कमरे में बाहरी व्यक्ति के आने या जाने की अनुमति नहीं है।
BCCI ने सभी 10 फ्रेंचाइजी के लिए 8 पन्नों का निर्देश जारी किया, जिसमें स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को निर्धारित करते समय प्रोटोकॉल के कुछ गंभीर उल्लंघनों के बारे में चिंता व्यक्त की गई है। BCCI ने कहा है कि आने वाले समय में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालना करना होगा। BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया की ओर से जारी लेटर के आधार पर न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि सभी टीमों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों का ध्यान रखें।
BCCI ने जताई चिंता
देवजीत सैकिया ने इस चिट्ठी में कहा है, 'मौजूदा सत्र के दौरान कुछ घटनाओं को देखते हुए यह सलाह जारी की गई है। इसका उद्देश्य आईपीएल से जुड़े सभी स्टेकहोल्ड्स से अपेक्षित प्रोफेशनलिज्स, अनुशासन, सुरक्षा जागरूकता और प्रोटोकॉल का पालन करने के मानकों को मजबूत करना है।’ बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी एवं सुरक्षा इकाई (ACSU) ने उल्लंघनों के कुछ मामलों की रिपोर्ट की है और बोर्ड ने इनकी ओर इशारा करते हुए स्थिति को स्पष्ट किया है।
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देवजीत सैकिया के मुताबिक, बीसीसीआई के संज्ञान में आया है कि मौजूदा आईपीएल सत्र के दौरान खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ के सदस्यों और टीम अधिकारियों से जुड़े दुर्व्यवहार और प्रोटोकॉल उल्लंघन की कुछ घटनाएं हुई हैं। अगर इन घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो टूर्नामेंट, संबंधित फ्रेंचाइजी और बीसीसीआई की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इससे व्यक्तियों और फ्रेंचाइजी को गंभीर कानूनी दायित्व और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।’
कमरों में बाहरी लोगों के जाने से दिक्कत
बीसीसीआई की मुख्य चिंता खिलाड़ियों के होटल के कमरों में ‘अनधिकृत व्यक्तियों’ के आने को लेकर है। पत्र में कहा गया है, ‘यह देखा गया है कि कुछ खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के सदस्यों ने संबंधित आईपीएल फ्रेंचाइजी टीम के मैनेजर की जानकारी या अनुमति के बिना अनधिकृत व्यक्तियों को होटल के अपने कमरों में प्रवेश करने की अनुमति दी है। कई मामलों में टीम मैनेजर को ऐसे मेहमानों की मौजूदगी के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था। इस चलन को तत्काल प्रभाव से सख्ती से प्रतिबंधित किया जाता है।’ सभी खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के सदस्यों को भी तीन सूत्रीय निर्देश दिए गए थे जिनका पालन करना आवश्यक होगा।
खिलाड़ियों के लिए नियम
पहला: किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसकी पहचान कुछ भी हो या टीम के सदस्य से उसका संबंध कुछ भी हो या उसका घोषित उद्देश्य कुछ भी हो, टीम मैनेजर की पूर्व सूचना और स्पष्ट लिखित अनुमति के बिना खिलाड़ी या सहायक स्टाफ सदस्य के होटल के कमरे में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दूसरा: मेहमानों का स्वागत केवल होटल की तय जगह जैसे लॉबी या होटल के रिसेप्शन लाउंज में ही किया जाएगा। किसी भी अतिथि को होटल के निजी कमरों में तब तक नहीं ले जाया जाएगा जब तक कि टीम मैनेजर ने इसके लिए लिखित रूप में विशेष अनुमति न दी हो।
तीसरा: बीसीसीआई सभी फ्रेंचाइजी का ध्यान शीर्ष स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में टारगेटेड यौन शोषण और ‘हनी ट्रैपिंग’ (सुनियोजित जासूसी या ब्लैकमेलिंग का तरीका, जिसमें किसी व्यक्ति को प्रेम, यौन आकर्षण या भावनात्मक प्रलोभन में फंसाया जाता है) के जोखिमों की ओर आकर्षित करता है। यौन दुर्व्यवहार से जुड़े भारतीय कानूनों के अंतर्गत गंभीर कानूनी आरोपों को जन्म देने वाली घटनाओं की संभावना को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। आईपीएल फ्रेंचाइजी को ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए हर समय सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए।
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इसमें कहा गया है कि फ्रेंचाइजी मालिकों से इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपेक्षा की जाती है। इसमें उन अज्ञात टीम मालिकों की ओर से किए गए उल्लंघनों का भी जिक्र किया गया है जिन्होंने खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों की पहुंच वाले क्षेत्रों की (पीएमओए) की पवित्रता को नहीं बनाए रखा है। BCCI इस पर चिंता व्यक्त करता है कि कुछ आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों ने PMOA प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया है। खास तौर पर ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिक मैच के दौरान खिलाड़ियों से बातचीत करने, उनके पास जाने, उन्हें गले लगाने या किसी अन्य प्रकार से शारीरिक रूप से संपर्क करने का प्रयास करते हैं। भले ही ऐसा व्यवहार सद्भावना से किया गया हो लेकिन यह प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है और टीम की कार्यप्रणाली और मैच के संचालन में हस्तक्षेप माना जा सकता है।
टीम मालिकों के लिए निर्देश
पहला: आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों और उनके प्रतिनिधियों को मैच के दौरान डगआउट, ड्रेसिंग रूम या मैदान में खिलाड़ियों या टीम के अधिकारियों के साथ बातचीत करने या उन तक पहुंचने को सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है।
दूसरा: सभी फ्रेंचाइजी मालिकों को आईपीएल के पीएमओए प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
तीसरा: फ्रेंचाइजी मैनेजमेंट को यह सुनिश्चित करना होगा कि आईपीएल फ्रेंचाइजी मालिकों और उनके सहयोगियों को हर मैच के दिन से पहले लागू प्रोटोकॉल के बारे में पूरी जानकारी दी जाए।
वेपिंग पर BCCI ने क्या कहा?
असम के क्रिकेटर और राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग का मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम में वेपिंग (ई-सिगरेट का सेवन) करने से न केवल फ्रेंचाइजी बल्कि बीसीसीआई को भी काफी बदनामी झेलनी पड़ी है। देवजीत सैकिया ने रियान का नाम लिए बिना लिखा है, ‘ड्रेसिंग रूम और टूर्नामेंट की अन्य जगहों के अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में वेपिंग के मामलों को बीसीसीआई के संज्ञान में लाया गया है। इस पर गौर किया जाना चाहिए की भारतीय कानून के तहत ई-सिगरेट प्रतिबंधित हैं।आयोजन स्थल के परिसर के भीतर इस तरह के आचरण में लिप्त पाए जाने वाला कोई भी व्यक्ति न केवल बीसीसीआई और आईपीएल के नियमों का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि वह इस संबंध में लागू कानूनों के अंतर्गत अपराध भी कर रहा है।’ उन्होंने कहा है कि इसलिए आईपीएल टूर्नामेंट से जुड़े सभी स्थलों (ड्रेसिंग रूम, डगआउट, टीम होटल और अभ्यास क्षेत्र) में वेपिंग, ई-सिगरेट और सभी प्रतिबंधित पदार्थों का उपयोग करने पर सख्त प्रतिबंध है।
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