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ग्रैंड स्लैम जीतने में बिजी हो गई थीं बिली जीन किंग, 65 साल बाद पूरी की डिग्री

एक समय पर टेनिस के लिए पढ़ाई छोड़ देने वाली बिली जीन किंग की पढ़ाई 65 साल के बाद पूरी हुई है और उन्होंने ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर ली है।

billie jean king with her degree

बिली जीन किंग, Photo Credit: Social Media

मशहूर टेनिस खिलाड़ी रहीं बिली जीन किंग अब 82 साल की हो गई हैं। 39 ग्रैंड स्लैम जीतने वाली बिली जीन किंग ने इस उम्र में भी जबरदस्त स्मैश लगा रही हैं। यह स्मैश टेनिस कोर्ट पर नहीं कॉलेज में लग रहे हैं। 65 साल के लंबे इंतजार के बाद बिली जीन किंग की कॉलेज डिग्री पूरी हो गई है और वह इतिहास में ग्रेजुएट हो गई हैं। उनकी एक तस्वीर सोशल मीडया पर वायरल हो गई है जिसमें वह डिग्री लेने अपने कॉलेज पहुंची हैं और इसका जश्न भी मना रही हैं। उन्होंने कहा है कि जितना सोचा था, यह डिग्री उससे भी कहीं ज्यादा मायने रखती है।


82 साल की दिग्गज बिली जीन किंग सोमवार को कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिलिस के एक कार्यक्रम में पहुंचीं जहां उन्हें इतिहास में आर्ट्स ग्रैजुएट की उपाधि हासिल की। खेल में महिलाओं की भूमिका और LGBTQ+ अधिकारों के लिए हमेशा मुखर रहीं बिली जीन किंग ने अपने इस कोर्स में भी इसी कम्युनिटी के अधिकारों पर चर्चा की। अब उनकी जो तस्वीर सामने आई है उसमें उनकी ड्रेस पर 'स्टूडेंट एथलीट' और 'G.O.A.T.' जैसी चीजें लिखी गई हैं। इस मौके पर भी उन्होंने स्टेज पर एक रैकेट थामा और अपने साथी छात्रों की ओर बॉल उछाली।

 

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क्या बोलीं बिली जीन किंग?

अपनी इस कामयाबी पर बिली जीन ने कहा, 'किसी भी काम को पूरा करने के लिए देर कभी नहीं होती फिर चाहे आपकी उम्र जो भी हो, चाहे आपकी क्षमता जो भी हो, अगर आप कुछ चाहते हैं तो उसके लिए प्रयास करें। मैंने जितना सोचा था यह मेरे लिए उससे कहीं ज्यादा मायने रखता है। मुझे बहुत खुशी है कि मैं डिग्री हासिल करने में सफल रही।’

 

बता दें कि बिली जीन किंग ने दो साल पहले घोषणा की थी कि वह उसी कॉलेज में अपनी डिग्री पूरी करेंगी, जहां शारीरिक शिक्षा भवन के बाहर उनकी कांसे की मूर्ति लगाई गई है। वह कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने वाली अपने परिवार की पहली सदस्य हैं। बिली जीन किंग ने 1961 में कॉलेज में दाखिला लिया था। यह वही साल था जब उन्होंने अपना पहला विंबलडन खिताब जीता था। यह खिताब उन्होंने विमेन्स डबल्स में जीता था। विंबलडन में उन्होंने कुल 20 खिताब जीते। इसके बाद उन्होंने जल्द ही पढ़ाई छोड़ दी थी। उनके नाम पर ग्रैंड स्लैम में कुल 39 खिताब दर्ज हैं।

 

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इसमें कुल 11 सिंगल्स, 16 वुमनेन्स डबल्स और 11 मिक्स्ड डबल्स के खिताब शामिल हैं। आगे चलकर उ्नहोंने वुमनेन्स टेनिस असोसिएशन की स्थापना भी की और खेल में महिलाओं को बराबर पैसे दिए जाने की लड़ाई भी लड़ी। अपने काम के चलते अमेरिका में उन्हें प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीम, द क्रांग्रेसनल गोल्ड मेडल और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया।

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