बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप 2026 (BATC 2026) में भारतीय महिला टीम का सफर निराशाजनक तरीके से खत्म हुआ। डिफेंडिंग चैंपियन भारत को शुक्रवार के क्वार्टर फाइनल मैच में चीन के हाथों 0-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने भारत की टाइटल बचाने और गोल्ड मेडल बचाने की उम्मीदों को तोड़ दिया।
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्टार शटलर पीवी सिंधु की गैरमौजूदगी थी। सिंधु एक चोट के कारण कोर्ट पर नहीं उतर पाईं, जिसका सीधा असर टीम के हौसले और परफॉर्मेंस पर पड़ा।
मुकाबले की शुरुआत पहले सिंगल्स से हुई, जहां वर्ल्ड नंबर 42 तान्वी से बड़ी उम्मीदें थीं। हालांकि, चीन की वर्ल्ड नंबर 10 खिलाड़ी गाओ फांग जिए के सामने तान्वी बेबस नजर आईं। गाओ ने एकतरफा खेल दिखाते हुए तान्वी को महज 21-9, 21-9 से मात देकर चीन को 1-0 की बढ़त दिला दी।
यह भी पढ़ें: 16 चौके-छक्के... U19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने ठोका धमाकेदार शतक
डबल्स के अंत में मिली हार
दूसरे मैच में गायत्री गोपीचंद और त्रीसा जॉली की जोड़ी ने भारतीय उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए जी-जान लगा दी। वर्ल्ड नंबर 4 की चीनी जोड़ी (जिया यी फान और झांग शू शियान) के खिलाफ भारतीय जोड़ी ने पहले सेट में कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंत में अनुभव की कमी खली। गायत्री और त्रीसा को 22-24, 18-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने चीन को 2-0 की निर्णायक बढ़त दिला दी और भारत को बैकफुट पर धकेल दिया।
यह भी पढ़ें: RCB vs DC: WPL फाइनल में हिट विकेट हो गई थीं राधा यादव? जानिए क्या है असलियत
मैराथन मुकाबले में रक्षित्ता की हार
तीसरे मैच में रक्षित्ता रामराज के कंधों पर टीम को वापसी कराने की भारी जिम्मेदारी थी। चीन की शू वेन जिंग के खिलाफ रक्षित्ता ने शानदार तकनीक और धैर्य का परिचय दिया। 69 मिनट तक चले इस मैराथन मुकाबले में रक्षित्ता ने एक समय जीत की उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन निर्णायक सेट के अंतिम पलों में वे लय बरकरार नहीं रख सकीं और 21-14, 15-21, 21-17 से मैच गंवा बैठीं।
यह भी पढ़ें: रिंकू सिंह का फेसबुक अकाउंट हैक, मोनेटाइजेशन के पैसे ले साइबर ठग
शानदार शुरुआत, मगर अंत रहा फीका
भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट की शुरुआत म्यांमार के खिलाफ 5-0 की धमाकेदार जीत के साथ की थी। हालांकि, ग्रुप स्टेज के अंतिम मैच में थाईलैंड से मिली 2-3 की हार ने क्वार्टर फाइनल की राह कठिन कर दी थी। 2024 में ऐतिहासिक स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम के लिए इस साल पीवी सिंधु की चोट और खिलाड़ियों की निरंतरता की कमी सबसे बड़ी बाधा साबित हुई।