कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 39 मेडल जीतकर टैली में चौथे स्थान पर फिनिश किया। ग्लास्गो में आयोजित हुए इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में लागत कम रखने के लिए स्पोर्ट्स इवेंट्स की संख्या घटा दी गई थी। शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और क्रिकेट जैसे खेलों को बाहर कर दिया गया था, जिससे भारत के कम मेडल आने की संभावना थी लेकिन 31 फीसदी भारतीय एथलीट्स मेडल के साथ लौटे।
पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में सक्सेस रेट 29 फीसदी ही था। ग्लास्गो में भारतीय एथलीट्स के इस शानदार प्रदर्शन से 2028 में होने वाले आगामी ओलंपिक में ज्यादा मेडल आने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत 6 मेडल ही जीत पाया था।
बॉक्सिंग में भारत का प्रदर्शन कमाल का रहा। 7 गोल्ड समेत कुल 10 मेडल आए। महिला मुक्केबाजों ने 5 गोल्ड जीते। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 7 महिला मुक्केबाजों ने क्वालिफाई किया था, जिसमें से 6 ने कोई न कोई मेडल जरूर जीता। भारतीय महिला मुक्केबाजी में इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा थी कि निकहत जरीन, नीतू घंघास और मीनाक्षी हुड्डा जैसी मुक्केबाज क्वालिफाई भी नहीं कर सकी थीं। पुरुष मुक्केबाजों में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने गोल्ड मेडल हासिल किए।
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अस्मिता डे ने जगाई उम्मीदें
जूडो में अस्मिता डे ने गोल्ड जीतकर ओलंपिक मेडल की उम्मीदें जगा दी हैं। इससे पहले जूडो में भारत कभी भी कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड नहीं जीत सका था। अस्मिता ने एक पॉइंट से पीछे रहने के बाद दमदार वापसी की और पोडियम पर टॉप पर फिनिश कर इस सूखे को खत्म किया। मेंस कैटेगरी में हर्ष सिंह ने भी गोल्ड जीता। वहीं यामिनी मौर्य ने सिल्वर हासिल किया।
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतना ओलंपिक मेडल की गारंटी नहीं देता। ऐसा इसलिए, क्योंकि खेलों के महाकुंभ में अमेरिका, चीन, जापान, साउथ कोरिया और कई यूरोपीय देशों जैसे दुनिया के बेस्ट खिलाड़ी उतरते हैं लेकिन अस्मिता ने जिस दबदबे के साथ प्रदर्शन किया, उससे उनसे उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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एथलेटिक्स में मेडल आए लेकिन...
बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स में भी भारत की मेडल की संख्या दोहरे अंको में रही। हालांकि एथलेटिक्स में एक भी गोल्ड नहीं आया। दिग्गज जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा सिल्वर ही हासिल कर पाए। डबल ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज 28 साल के हो चुके हैं। अगले ओलंपिक तक वह लगभग 30 के हो जाएंगे।
नीरज लगातार चोटों से भी जूझ रहे हैं। ऐसे में उनके अब ओलंपिक मेडल जीतने की संभावना कम है। एथलेटिक्स में उनके अलावा और कोई फिलहाल बड़ा नाम नजर नहीं आता, जो ओलंपिक मेडल जीत सके। यशवीर सिंह और रोहित यादव जैसे युवा जैवलिन थ्रोअर्स ने प्रभावित किया है लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं है।