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क्या हुआ जब डॉन ब्रैडमैन से मिले थे मेजर ध्यानचंद, यह किस्सा जानते हैं आप?

ध्यानचंद और डॉन ब्रैडमैन की 1935 में एडिलेड में हुई मुलाकात खेल जगत का यादगार किस्सा है। ब्रैडमैन ने ध्यानचंद का हॉकी मैच भी देखा था।

dhyan chand and don bradman

ध्यानचंद और डॉन ब्रैडमैन, Photo Credit- Social Media

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भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद का नाम आज भी देश के बड़े खिलाड़ियों में लिया जाता है। उनके खेल से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को याद हैं। ऐसा ही एक खास किस्सा उनकी और ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन की मुलाकात का है। दोनों की मुलाकात साल 1935 में ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में हुई थी। उस समय ध्यानचंद भारतीय हॉकी टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर थे जबकि ब्रैडमैन क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके थे।

 

ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था। साल 1935 में वह 29 साल के थे। वह 1928 और 1932 के ओलंपिक में भारत की गोल्ड मेडल जीतने वाली हॉकी टीम का हिस्सा रह चुके थे। वहीं डॉन ब्रैडमैन उस समय 26 साल के थे और ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े क्रिकेट खिलाड़ियों में गिने जाते थे। दोनों अपने-अपने खेल में काफी आगे थे इसलिए उनकी मुलाकात को खेल की दुनिया का खास पल माना जाता है।

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ध्यानचंद की थी ब्रैडमैन से मिलने की इच्छा

भारतीय हॉकी टीम जब एडिलेड पहुंची तो ध्यानचंद की इच्छा डॉन ब्रैडमैन से मिलने की थी। टीम के सहायक मैनेजर पंकज गुप्ता ने दोनों की मुलाकात कराने में मदद की। इसके बाद भारतीय टीम के सम्मान में एडिलेड टाउन हॉल में कार्यक्रम रखा गया जिसमें ब्रैडमैन भी पहुंचे।

 

कार्यक्रम में दोनों खिलाड़ियों ने हाथ मिलाया और एक-दूसरे से मुलाकात की। ब्रैडमैन ने भारतीय हॉकी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि हॉकी में भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया से बेहतर हैं और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उनसे सीख सकते हैं।

 

इसी दिन भारतीय टीम का मुकाबला साउथ ऑस्ट्रेलिया से एडिलेड ओवल में हुआ। ध्यानचंद ने बाद में बताया था कि यह पहला हॉकी मैच था जिसे ब्रैडमैन ने देखा था। मैच में भारत ने साउथ ऑस्ट्रेलिया को 10-1 से हरा दिया। हाफ टाइम तक भारत 7-0 से आगे था। रूप सिंह ने 4 गोल, लॉरी डेविडसन ने 3, पीटर फर्नांडिस ने 1 और ध्यानचंद ने 2 गोल किए।

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दौरे पर ध्यानचंद ने लगाए 201 गोल

1935 का ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरा भारतीय हॉकी टीम के लिए शानदार रहा। टीम ने कुल 48 मैच खेले और सभी में जीत हासिल की। भारत ने इन मैचों में 584 गोल किए जबकि विरोधी टीमें सिर्फ 40 गोल कर सकीं। ध्यानचंद ने 43 मैचों में 201 गोल किए। उनके इस प्रदर्शन के बाद ऑस्ट्रेलिया में ध्यानचंद की तुलना डॉन ब्रैडमैन से होने लगी। पंकद गुप्ता ने इस तुलना पर कहा था कि लोग ध्यानचंद को हॉकी का डॉन ब्रैडमैन कहते हैं लेकिन वह ब्रैडमैन को क्रिकेट का ध्यानचंद कहना पसंद करेंगे।

 

दोनों की मुलाकात से जुड़ा एक और किस्सा भी काफी मशहूर है। कहा जाता है कि ब्रैडमैन ने ध्यानचंद का खेल देखकर उनकी तुलना क्रिकेट में रन बनाने से की थी। ध्यानचंद ने अपनी आत्मकथा 'Goal!' में भी ब्रैडमैन से हुई मुलाकात का जिक्र किया था और उनके साथ खिंचवाई तस्वीर को खास बताया था।

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इसके बाद ध्यानचंद ने 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की और भारत ने वहां भी गोल्ड मेडल जीता। वहीं डॉन ब्रैडमैन ने टेस्ट क्रिकेट में 99.94 का औसत बनाया। दोनों अलग-अलग खेलों के महान खिलाड़ी थे और 1935 में एडिलेड में हुई उनकी मुलाकात आज भी खेल इतिहास का यादगार किस्सा मानी जाती है।

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