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नम आंखें, हताशा... महिला हॉकी वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भारतीय खेमे का हाल

भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो वाले मुकाबले में जीत नहीं हासिल कर सकी, जिससे महिला हॉकी वर्ल्ड कप उसका शानदार सफर थम गया।

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हॉकी वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद हताश भारतीय खिलाड़ी, Photo Credit: Screengrab via Hockey India Video

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नीदरलैंड्स के वैगनर स्टेडियम में हूटर बजते ही डगआउट में बैठीं भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया और उनकी साथी गोलकीपर बिछू देवी अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उनके ठीक पीछे बैठी इशिका चौधरी को यकीन ही नहीं हुआ कि अपने पहले ही वर्ल्ड कप में वह मेडल के इतने करीब पहुंचकर चूक गईं। आस्ट्रेलिया से दूसरे चरण का मैच गोलरहित ड्रॉ रहने के बाद भारतीय टीम समान अंक के बावजूद गोल की गणना के आधार पर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे बयां कर रहे थे कि उन पर क्या बीत रही है।

 

मैदान से निकलकर अपनी टीम बस का इंतजार कर रही खिलाड़ियों की आंखें लाल थीं। मुख्य कोच शोर्ड मारिन मीडिया से बात कर रहे थे लेकिन अपनी उदासी नहीं छिपा सके। टीम के वैज्ञानिक सलाहकार और एथलीट परफार्मेस प्रमुख वेन लोम्बार्ड और सीनियर खिलाड़ी पहली बार वर्ल्ड कप खेल रही खिलाड़ियों का हौसला बंधा रहे थे। भारतीय टीम में 11 खिलाडियों का यह पहला वर्ल्ड कप है और उन्हें यकीन की नहीं हो रहा था कि वे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हैं।

 

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मेडल से चूकने के बाद टूटे खिलाड़ी

सीढ़ियों पर बैठकर फोन पर अपनी मां से बात कर रही एक खिलाड़ी ने कहा, 'यह सबसे अच्छा मौका था। हम इतने करीब पहुंच गए थे और अब पता नहीं कब ये मौका मिलेगा।' तीसरा वर्ल्ड कप खेल रहीं सविता चुपचाप खड़ी थीं और इतना ही बोल सकीं कि यह बेस्ट मौका था। अनुभवी मिडफील्डर नेहा गोयल के आंसू नहीं थम रहे थे। उनसे कहा गया कि आगे एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना है तो उन्होंने सिर्फ हां में सिर हिलाया और कुछ बोल नहीं सकीं। 

 

भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप में कभी मेडल नहीं जीती है और उसका बेस्ट प्रदर्शन 1974 में फ्रांस में खेले गए पहले ही वर्ल्ड कप में था, जब टीम चौथे स्थान पर रही थी। अब भारत को पांचवें-छठे स्थान का मुकाबला 27 अगस्त को खेलना है और वहां भी बेस्ट प्रदर्शन होगा। उन्हें ढांढस देने के लिए यह बताने पर भी एक खिलाड़ी का जवाब था, 'मेडल तो मेडल ही होता है ना।'

 

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क्या बोलीं कप्तान सलीमा टेटे?

टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, 'हम खुश नहीं है क्योंकि मेडल के इतने करीब आने के बाद चूकना नहीं था। हमने इसके लिए इतनी मेहनत की थी। अच्छा भी खेले लेकिन फिनिश नहीं कर पाए।'


उन्होंने कहा, 'हम हार में भी साथ हैं और जीत में भी। हमें इससे सीख मिली है कि कोई मौका नहीं गंवाना है। अब पांचवें स्थान के लिए खेलना है और दोबारा वापसी करेंगे। हमने अभी तक जुझारूपन नहीं छोड़ा है और इस आखिरी मैच में भी नहीं छोड़ेंगे।' 

 

सलीमा ने कहा कि यह दिन उनकी टीम का नहीं था, जबकि इससे पहले हर मैच में खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, 'इतने बड़े मंच पर आप खेल रहे हैं तो यहां आकर खाली हाथ जाना अच्छा नहीं लग रहा लेकिन हम टीम का मनोबल बढाएंगे और पांचवां स्थान लेकर ही जाएंगे।'


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