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दिल्ली में शुरू हुई कॉर्फबॉल की लीग, क्या है यह खेल, भारत में कितना लोकप्रिय है?

भारत में कॉर्फबॉल की पहली फ्रेंचाइजी लीग 'KPL' की शुरुआत हो गई है। पढ़िए इस खेल को कैसे खेला जाता है और यह देश में कितना लोकप्रिय है।

Korfball Premier League

कॉर्फबॉल प्रीमियर लीग 2026 के दौरान एक्शन में खिलाड़ी, Photo Credit: KPL/Insta

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नई दिल्ली के त्यागराज इनडोर स्टेडियम में 19 सितंबर को कॉर्फबॉल प्रीमियर लीग (KPL) के पहले सीजन के आगाज के साथ भारतीय खेल जगत में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह भारत की पहली प्रोफेशनल मिक्स्ड जेंडर कॉर्फबॉल लीग है। इसमें एक कॉम्पैक्ट फ्रेंचाइजी फॉर्मेट अपनाया गया है, जिसका मकसद भारतीय और इंटरनेशनल टैलेंट को एक ही कोर्ट पर लाना है। इस लीग में भारतीय प्लेयर्स के अलावा 15 से ज्यादा देशों के खिलाड़ी उतर रहे हैं। 

 

KPL 2026 अगले महीने की 4 तारीख तक चलेगा। 8 फ्रेंचाइजी टीमों वाली इस लीग के पहले चरण में राउंड रॉबिन फॉर्मेट में ग्रुप स्टेज के मुकाबले होंगे। हर दिन 2 मुकाबले खेले जाएंगे। इसके बाद 3 अक्टूबर को सेमीफाइनल, जबकि 4 अक्टूबर को फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: Asian Games 2026: भारतीय टीम सीधे क्वार्टर-फाइनल क्यों खेलेगी, फॉर्मेट क्या है?

क्या है कॉर्फबॉल खेल?

कॉर्फबॉल पहली नजर में बास्केटबॉल जैसा लग सकता है लेकिन इसके नियम और खेलने का अंदाज बिल्कुल अलग है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुरुष और महिला खिलाड़ी एक साथ एक ही टीम से खेलते हैं। यानी मिक्स्ड टीम मुकाबले में उतरती है। किसी टीम में 4 पुरुष और 4 महिला खिलाड़ी होने जरूरी हैं। कॉर्फबॉल की यही खूबी उसे बाकी बॉल गेम्स से अलग खड़ा करती है। पुरुष और महिला प्लेयर्स दोनों की भूमिका अहम होती है। पुरुष खिलाड़ी पुरुषों को और महिला खिलाड़ी महिलाओं को डिफेंड करती हैं।

 

इस खेल में गेंद लेकर दौड़ना या बास्केटबॉल की तरह ड्रिबल करना मना है। खिलाड़ी पास के जरिए गेंद को आगे बढ़ाते हैं। यह खेल मुख्य रूप से पासिंग और पोजिशनिंग पर आधारित है। स्कोर करने के लिए गेंद को करीब 3.5 मीटर ऊंची बास्केट (कॉर्फ) में डालना होता है। यहां बास्केट में बास्केटबॉल की तरह बैकबोर्ड नहीं होता। इसलिए खिलाड़ियों को अलग-अलग एंगल से सटीक निशाना लगाना पड़ता है। 

 

कॉर्फबॉल को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे सिर्फ गेंद और बास्केट का खेल नहीं मानना चाहिए। इसमें एक खिलाड़ी की सफलता में दूसरे खिलाड़ी की भी मदद रहती है। गेंद तेजी से पास होती है, खिलाड़ी अपनी पोजिशन बदलते हैं और कुछ ही सेकंड में एक साधारण सा पास स्कोरिंग का मौका बना देता है।

 

यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स 2026 मेडल टैली: भारत की टॉप-10 में एंट्री

कैसे शुरू हुआ यह खेल?

कॉर्फबॉल खेल की शुरुआत साल 1902 में नीदरलैंड्स में हुई थी। इस अनोखे खेल का आविष्कार एम्स्टर्डम के एक डच स्कूल टीचर निको ब्रोखुयसेन ने किया था। इसका मकसद था कि लड़के और लड़कियां एक साथ खेलें और खेल के जरिए जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा मिले। उन्हें इस खेल को शुरू करने की प्रेरणा स्वीडन यात्रा के दौरान वहां खेले जाने वाले 'रिंगबॉल' खेल से मिली थी।

भारत में कितना लोकप्रिय है कॉर्फबॉल?

भारत में कॉर्फबॉल का लंबा इतिहास है। यह देश में 1979 से खेला जा रहा है और अब तक 25 से ज्यादा राज्यों में पहुंच चुका है। कॉर्फबॉल की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ी है और अब प्रोफेशनल लीग की दस्तक से इस खेल को नई पहचान मिलने और खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर खुलने की उम्मीद है।

भारत का प्रदर्शन कैसा है?

भारतीय टीम इंटरनेशनल लेवल पर 5 मेडल जीत चुकी है। टीम ने 1992, 1998, 2002 और 2002 एशिया-ओशिनिया चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम करने के बाद 2008 एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर जीता था। बता दें कि भारत 1995 में वर्ल्ड कॉर्फबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी भी कर चुका है।

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