नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर भारत लौटे आर प्रज्ञानानंदा को तमिलनाडु सरकार ने 50 लाख रुपये का ईनाम दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सोमवार (8 जून) को प्रज्ञानानंदा को ईनामी राशि की चेक सौंपी और उन्हें एक मोमेंटो भी दिया।
विजय ने प्रज्ञानानंदा को सम्मानित करने के बाद इस युवा ग्रैंडमास्टर के साथ चेस की एक बाजी भी खेली। इस सेरेमनी में सरकार के आला अधिकारी, स्पोर्ट्स अथॉरिटीज और प्रज्ञानानंदा के माता-पिता भी उपस्थित थे।
प्रज्ञानानंदा ने रचा था इतिहास
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने 5 जून को ओस्लो में नॉर्वे चेस का खिताब जीतकर इतिहास रचा था। इस टूर्नामेंट को जीतने वाले वह पहले भारतीय बने थे। प्रज्ञानानंदा ने इस जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा है कि मैग्नस कार्लसन सहित दुनिया के कुछ टॉप खिलाड़ियों को हराना इस खिताब को और यादगार बनाता है।
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प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस में वर्ल्ड नंबर-1 कार्लसन को दो बार हराया था। वह कार्लसन को एक ही टूर्नामेंट में दो बाहर हराने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। उनसे पहले 2007 में विश्वनाथन आनंद ने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी थी।
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प्रज्ञानानंदा ने नहीं की थी अच्छी शुरुआत
नॉर्वे चेस में प्रज्ञानानंदा की शुरुआत कुछ खास नहीं रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल करते हुए खिताब पर कब्जा जमा लिया। प्रज्ञानानंदा ने कार्लसन को दो बार मात देने के लिए अलावा वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश को भी शिकस्त दी। इसके बाद उन्होंने फाइनल राउंड की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की। प्रज्ञानानंदा ने फाइनल राउंड में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर अपने अंकों की संख्या को 18 तक पहुंचा दिया और एलीट चेस की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक को अपने नाम कर लिया।