युवा भारतीय सनसनी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट जीत लिया है। पंजाब से आने वाली 17 साल की तन्वी ने रविवार (2 अगस्त) को महिला सिंगल्स के फाइनल में वियतनाम की छठी वरीय थुई लिन्ह एनगुएन को सीधे गेम में हरा दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपना पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीता। पिछले साल अमेरिकी ओपन सुपर 300 में उप-विजेता रहीं तन्वी ने फाइनल में एनगुएन को 36 मिनट में 21-16, 21-16 से हराया।
जीत के बाद तन्वी ने कहा, 'यहां यह खिताब जीतकर मैं बेहद खुश हूं।' 17 साल और 222 दिन की उम्र में ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे कम उम्र की चैंपियन बनीं तन्वी ने इस मामले में ताइवान की महान खिलाड़ी ताई जू यिंग का रिकॉर्ड तोड़ा। तन्वी ने ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद कहा, 'मुझे इस टूर्नामेंट का खिताब जीतने की उम्मीद नहीं थी। मेरा टारगेट सिर्फ अपना बेस्ट प्रदर्शन करना था। मैंने एक बार में एक मैच पर ध्यान दिया और पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन किया।'
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साइना नेहवाल के बाद पहली भारतीय
पीवी सिंधू के पूर्व मेंटर पार्क ताए संग से कोचिंग लेने वाली तन्वी 2008 में साइना नेहवाल के बाद ताइपे ओपन का महिला सिंगल्स खिताब जीतने वाली पहली भारतीय हैं। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने केवल एक गेम गंवाया। तन्वी ने कहा, 'मैं काफी नर्वस थी लेकिन मैंने यही सोचा कि मुझे अपना शत प्रतिशत देना है और अपने स्वाभाविक खेल पर भरोसा रखना है।'
उन्होंने आगे कहा, 'लगातार पांच मैच खेलना मेरे लिए भी आसान नहीं था लेकिन मुझे पूरे टूर्नामेंट में निरंतरता बनाए रखनी थी। अब मुझे सुपर 500 और सुपर 750 स्तर के टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए और अधिक मेहनत करनी होगी। मैं लगातार कड़ी मेहनत करती रहूंगी।'
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फाइनल में तन्वी की आक्रामक शुरुआत
तन्वी ने अमेरिकी ओपन के फाइनल में अपने सफर के दौरान भी एनगुएन को हराया था। इस भारतीय खिलाड़ी ने खिताबी मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने अपने प्रभावी ड्रॉप शॉट से एनगुएन को लगातार छकाते हुए 4-1 की बढ़त बना ली। ड्रॉप शॉट और क्रॉस कोर्ट स्मैश का बेहतरीन मिश्रण करते हुए भारतीय खिलाड़ी ने बढ़त को 10-2 तक पहुंचा दिया। वियतनामी खिलाड़ी तन्वी के खेल को पढ़ने और शटल की दिशा का सही आकलन करने में संघर्ष करती नजर आई। हालांकि इसके बाद तन्वी से लगातार कुछ सहज गलतियां हुईं, जिससे एनगुएन को वापसी का मौका मिला। इसके बावजूद तन्वी ने एक दमदार स्मैश लगाकर ब्रेक तक तीन अंक की बढ़त बरकरार रखी।
हाफ टाइम के बाद तन्वी ने फिर लय हासिल की और दोनों ओर से दमदार स्मैश लगाते हुए 15-9 की बढ़त बना ली। नेट और बैक कोर्ट से कुछ अंक गंवाने के बावजूद उन्होंने मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी। पांच गेम प्वाइंट हासिल करने के बाद उन्होंने क्रॉस कोर्ट स्मैश के साथ पहला गेम अपने नाम कर लिया। कोर्ट बदलने के बाद एनगुएन ने तेज शुरुआत करते हुए 3-0 की बढ़त बनाई और तन्वी को पूरे कोर्ट पर दौड़ाया।
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दूसरे गेम में की जबरदस्त वापसी
भारतीय खिलाड़ी ने धीरे-धीरे रैलियों पर नियंत्रण हासिल किया और शानदार नेट शॉट की मदद से स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया। इसके बाद उन्होंने विरोधी को लगातार बैक कोर्ट में धकेलते हुए नेट पर अपने नपे-तुले शॉट से दबाव बनाए रखा। तन्वी ने 8-4 की बढ़त बना ली। हालांकि एक बार फिर तन्वी की कुछ गलतियों के कारण वियतनाम की खिलाड़ी ने अंतर घटाकर 7-8 कर दिया। तन्वी ब्रेक तक 11-8 की बढ़त हासिल करने में सफल रहीं।
इसके बाद तन्वी ने धीरे-धीरे अपनी बढ़त 15-10 और फिर 18-12 तक पहुंचाई। उनके भ्रामक शॉट लगातार उन्हें महत्वपूर्ण अंक दिलाते रहे। 19-12 के स्कोर पर लाइन कॉल को लेकर उनकी चुनौती असफल रही लेकिन इसके तुरंत बाद दमदार स्मैश के साथ उन्होंने सात मैच प्वाइंट हासिल कर लिए। शुरुआती तीन मैच प्वाइंट गंवाने के बावजूद तन्वी ने चौथे अवसर का फायदा उठाते हुए मुकाबला और अपना पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया। जीत के बाद भावुक क्षण में तन्वी ने अपना गोल्ड मेडल उतारकर कोच पार्क के गले में पहनाया। इसके बाद दोनों ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं।
तन्वी ने हासिल किए ये भी मुकाम
तन्वी 17 साल और 222 दिन की उम्र में टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं। उन्होंने कोरिया के महान डबल्स खिलाड़ी ली योंग डे को पीछे छोड़ दिया, जो 2006 में मेंस डबल्स फाइनल में पहुंचने पर 17 साल और 287 दिन के थे।
पूर्व वर्ल्ड जूनियर नंबर एक तन्वी वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के एक ही सीजीन में दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने गर्ल्स सिंगल्स वर्ग में सिल्वर मेडल के अलावा मिक्स्ड टीम इवेंट में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता। वह उस भारतीय टीम की भी सदस्य थीं, जिसने एशियाई टीम चैंपियनशिप में देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता था।