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Ranji Trophy: जम्मू-कश्मीर या कर्नाटक, ड्रॉ हुआ रणजी फाइनल तो कौन बनेगा चैंपियन?

Ranji Trophy Final Rules: जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी के फाइनल में 3 दिन का खेल हो चुका है लेकिन अभी दोनों टीमों की पहली पारी पूरी नहीं हो पाई है। जानिए मुकाबला ड्रॉ होने पर चैंपियन किसे घोषित किया जाएगा।

Auqib Nabi Karun Nair Ranji Trophy Final

कर्नाटक के करुण नायर को क्लीन बोल्ड करने के बाद जोश में J&K के आकिब नबी, Photo Credit: PTI

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जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन का फाइनल मुकाबला हुबली में जारी है। KSCA हुबली क्रिकेट ग्राउंड पर हो रहे इस मुकाबले में 3 दिन का खेल हो चुका है लेकिन अभी दोनों टीमों की पहली पारी पूरी नहीं हो पाई है। जम्मू-कश्मीर की टीम अपनी पहली पारी में 584 रन बनाकर ऑलआउट हुई। इसके जवाब में कर्नाटक ने तीसरे दिन (26 फरवरी) स्टंप्स तक 5 विकेट के नुकसान पर 220 रन बना लिए हैं। वह जम्मू-कश्मीर के स्कोर से अभी भी 364 रन पीछे है।

 

मयंक अग्रवाल ने अकेले दम पर मोर्चा संभाल रखा है। मयंक 207 गेंद में 130 रन बनाकर खेल रहे हैं। उनके साथ क्रीज पर विकेटकीपर बल्लेबाज कृतिक कृष्ण हैं, जिन्होंने 27 रन बनाए हैं। इस मैच में 2 दिन का खेल बचा है लेकिन नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। आइए जानते हैं खिताबी मुकाबला ड्रॉ होने पर कौन सी टीम चैंपियन बनेगी।

 

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किसके सिर सजेगा ताज?

रणजी ट्रॉफी के नियमों के अनुसार, अगर फाइनल मैच ड्रॉ होता है तो पहली पारी में बढ़त हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर की टीम मुकाबले में काफी आगे है और वह बढ़त हासिल कर खिताब जीत सकती है। दूसरी तरफ कर्नाटक के पास भी मौके हैं। अगर यह टीम जम्मू-कश्मीर की पहली पारी के स्कोर को पार कर लेती है तो विजेता बन जाएगी। 

 

इसके अलावा अगर कर्नाटक की टीम बढ़त बनान में सफल नहीं रहती है लेकिन आखिरी दिन का खेल खत्म होने तक वह ऑलआउट नहीं होती है तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्रुप स्टेज में उसके पास जम्मू-कश्मीर से ज्यादा पॉइंट्स थे। अगर मुकाबले में बारिश का खलल पड़ता है और कर्नाटक की पहली पारी पूरी नहीं हो पाती है, तब भी उसे ही विजेता घोषित किया जाएगा।

 

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पहले क्या नियम थे?

रणजी ट्रॉफी में पहले अगर किसी कारण से दोनों टीमों की पहली पारी पूरी नहीं हो पाती थी, तो पहली पारी कम्पलीट करने के लिए एक अतिरिक्त दिन मिलता था। यानी मुकाबला छठे दिन तक खींच जाता था। 1981-82 रणजी ट्रॉफी के फाइनल में कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। तब कर्नाटक और दिल्ली की टक्कर हुई थी। पांचों दिन के खेल के बाद भी कोई टीम पहली पारी के आधार पर बढ़त नहीं ले पाई थी। इसके बाद मुकाबला छठे दिन में गया, जहां कर्नाटक को हार मिली थी।


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