कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) ग्राउंड पर रविवार (23 अगस्त) को जब भारतीय कप्तान
शुभमन गिल
ने टॉस के लिए आए, उससे पहले ही साफ हो चुका था कि कुलदीप यादव नहीं खेल रहे हैं। टॉस से लगभग 15 मिनट पहले ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को डेब्यू कैप सौंपा जा चुका था। कुलदीप ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में 25 ओवर डाले थे लेकिन वह सिर्फ 1 ही विकेट ले पाए थे।
कुलदीप की इकॉनमी 4 से ऊपर की रही थी। वह स्पिनर्स की मददगार गॉल की पिच पर कभी भी लय में नहीं दिखे, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि वह कोलंबो में नहीं खेलेंगे। हुआ भी वही। कोलंबो टेस्ट के लिए कुलदीप का नाम टीम शीट में नहीं था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने ट्वीट कर बताया कि कुलदीप वायरल बुखार से पूरी तरह से नहीं उबर सके। ऐसे में वह सेलेक्शन के लिए उपलब्ध नहीं थे।
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टीम मैनेजमेंट को कुलदीप को नहीं मिला सपोर्ट
BCCI ने कुलदीप को बीमार बताया लेकिन पहले से ही अटकलें थीं कि कोलंबो टेस्ट में उनकी जगह सारांश जैन का डेब्यू तय है। मैच से पहले टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और स्पिन बॉलिंग कोच साईराज बहुतुले ने कुलदीप का सपोर्ट किया था लेकिन प्लेइंग-XI में उनका नाम नहीं होना कुछ और इशारा कर रहा है। कुलदीप को पिछले साल ही इंग्लैंड दौरे पर एक भी टेस्ट नहीं खिलाया गया था। उन्होंने 5 टेस्ट मैचों की पूरी सीरीज बेंच पर ही बिताया।
दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद कुलदीप को डायरेक्ट प्लेइंग-XI में शामिल करने की मांग हो रही थी लेकिन टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा नहीं जताया। कुलदीप की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका मिला। बल्लेबाजी में गहराई लाने के लिए कुलदीप की बलि दी गई। अब श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट से उनके बाहर होने पर फिर से सवाल उठ रहे हैं कि क्या थोड़ी सी बल्लेबाजी की लालच में उन्हें नहीं खिलाया गया? वॉशिंगटन की तरह ही सारांश ऑफ स्पिन डालने के साथ बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज हैं।
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अश्विन के रहते कुलदीप का प्रदर्शन कैसा रहा?
कुलदीप ने 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। उन्हें अश्विन और
रवींद्र जडेजा
के टीम में रहते लगातार मौके नहीं मिले। उन्होंने 2022 तक सिर्फ 8 टेस्ट खेले थे। 2024 में उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज में 4 मैच खेलने को मिले। उसी साल अक्टूबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज के शुरुआती मुकाबले में कुलदीप को खिलाया गया।
इसके बाद उन्हें बाहर बैठा दिया गया। फिर उन्हें ग्रोइन इंजरी के चलते बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑस्ट्रेलिया नहीं ले जाया जा सका। इसी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अश्विन ने अपने संन्यास की घोषणा की थी। अश्विन के टीम में रहते कुलदीप ने लगभग 8 साल में 13 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 22.16 की बेहतरीन औसत से 56 विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने 4 बार 5 विकेट हॉल हासिल किया।
अब कुलदीप के आंकड़े कैसे हैं?
अश्विन के संन्यास के बाद कुलदीप को लगातार मौके मिलने की उम्मीदें थीं लेकिन वह 6 टेस्ट मैच ही खेल पाए हैं। इन 6 मैचों में कुलदीप ने 26.16 की औसत से 24 विकेट चटकाए हैं और उन्होंने एक बार 5 विकेट हॉल लिया है। उनके प्रदर्शन में थोड़ी गिरावट आई है लेकिन यह भी देखने वाली बात है कि अश्विन के संन्यास के बाद भी उन्हें लगातार नहीं खिलाया गया है, जिससे वह टीम में अपनी जगह पक्की कर सकें।
टेस्ट छोड़िए, अब तो कुलदीप व्हाइट बॉल क्रिकेट में भी नजरअंदाज किए जा रहे हैं। हाल ही में इंग्लैंड में 3 मैचों की वनडे सीरीज में भी उन्हें प्लेइंग-XI में नहीं रखा गया था। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में उन्हें एक ही मैच खिलाया गया। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान भी उन्हें एक ही मैच में उतारा गया था।