गुजरात के सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने सिर्फ 18 साल की उम्र में एक फर्जी ऐप बनाई थी। इस ऐप को वह दूसरे आरोपियों को बेच देता था। पुलिस के मुताबिक, इस आरोपी के फर्जी ऐप से कुछ आरोपियों ने देशभर में करीब 64.38 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। जांच के अनुसार, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेलीग्राम की मदद से एक फर्जी ऐप बनाई थी, जिसे वह दूसरे आरोपियों को बेचता था। इसी ऐप के जरिए अपराधियों ने 64.38 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की थी। पुलिस ने आरोपी को कानपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया।
सूरत पुलिस को इस मामले की जानकारी तब मिली, जब पिछले साल एक पीड़िता ने सूरत साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि आरोपी बैंकों की असली ऐप जैसी दिखने वाली फर्जी ऐप बनाता था। यह ऐप लोगों को व्हाट्सएप पर भेजी जाती थी। जैसे ही लोग इसे इंस्टॉल करते थे, उनका फोन हैक हो जाता था और बैंक खातों से लाखों रुपये निकाल लिए जाते थे। इसी मामले में पुलिस ने ऐप बनाने वाले आरोपी रोहित शाक्य को गिरफ्तार किया।
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कैसे बनाई फर्जी ऐप?
पुलिस के मुताबिक, रोहित शाक्य ने एआई और टेलीग्राम की मदद से ऐप तैयार की थी। इसमें सरकारी और निजी बैंकों जैसी दिखने वाली फर्जी ऐप बनाई जाती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक और फेडरल बैंक के नाम से फर्जी ऐप बनाई थीं। इसके अलावा डीमार्ट, बिग बास्केट और पीएम किसान के नाम से भी फर्जी ऐप तैयार की थीं। इन ऐप्स को आरोपी कथित तौर पर दूसरे आरोपियों को बेचता था, जिसके बदले उसे 15 हजार रुपये मिलते थे।
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इन ऐप्स के जरिए बाकी आरोपी लोगों के फोन हैक करते थे। वे व्हाट्सएप पर नकली ऐप भेजते थे, जिन्हें लोग असली ऐप समझकर इंस्टॉल कर लेते थे। इसके बाद अपराधी लोगों के बैंक खातों की जानकारी हासिल कर रुपये निकाल लेते थे। पुलिस ने रोहित के दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त कर लिया है, जिन्हें जांच के लिए डिजिटल फोरेंसिक टीम को भेज दिया गया है।