उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने नकली भारतीय करेंसी छापने वाले कथित गिरोह का खुलासा करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, जल्दी अमीर बनने की चाह में आरोपियों ने एक वेब सीरीज देखने के बाद नकली नोट छापने की योजना बनाई। इसके बाद दिल्ली के नरेला स्थित एक मकान में लैपटॉप, प्रिंटर, कागज और स्याही की मदद से 500 रुपये के नकली नोट तैयार किए जाने लगे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 500 रुपये के 800 नकली नोट बरामद किए हैं, जिनकी कुल अंकित कीमत 5.26 लाख रुपये है। तीन मोबाइल फोन और एक एसबीआई का एटीएम कार्ड भी मिला है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली करेंसी कहां-कहां खपाई गई और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं।
पुलिस के अनुसार, 14 अक्टूबर को बुढ़ाना पुलिस क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मेरठ-करनाल हाईवे पर वाजिद होटल के पास से बुढ़ाना-कांधला मार्ग पर एचपी गैस गोदाम जाने वाले रास्ते के नजदीक तीन युवक नकली नोट लेकर खड़े हैं।सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ट्यूबवेल के पास खड़े तीनों युवकों को घेरकर पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से 500 रुपये के कुल 800 संदिग्ध नकली नोट बरामद हुए। पुलिस ने नोटों को कब्जे में लेकर तीनों को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।
तीन आरोपियों के पास मिले नकली नोट
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम निवासी बागपत, हाल निवासी नरेला दिल्ली, महेंद्र निवासी पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड और टीनू निवासी दौलतपुर, सरधना, मेरठ के रूप में की है।पुलिस के मुताबिक, शुभम के पास से डेढ़ लाख रुपये, महेंद्र के पास से डेढ़ लाख रुपये और टीनू के पास से एक लाख रुपये के नकली नोट मिले। इस तरह कुल चार लाख रुपये के 800 नोट बरामद किए गए। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन और एक एसबीआई का एटीएम कार्ड भी जब्त किया गया है।
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दिल्ली के मकान में लैपटॉप और प्रिंटर से छापे नोट
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नकली नोट दिल्ली के नरेला स्थित शुभम के मकान में छापे जाते थे। इसके लिए लैपटॉप, प्रिंटर, कागज और स्याही समेत अन्य सामान का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वेब सीरीज देखने के बाद नकली नोट छापकर मुनाफा कमाने की योजना बनाई थी।जांच में सामने आया कि बरामद नोटों पर केवल चार अलग-अलग सीरियल नंबर थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी एक शीट पर चार अलग-अलग नंबर वाले नोट एक साथ छापते थे। अलग-अलग सीरियल नंबर तैयार करने में अधिक समय लगने के कारण वे सीमित नंबरों वाले नोट बड़ी संख्या में छाप रहे थे। पुलिस इस तरीके और बरामद नोटों की तकनीकी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संजय आहूजा निवासी देहरादून और राउडी उर्फ अनुराग शर्मा निवासी बरेली के नाम भी सामने आए हैं। आरोपियों ने कथित तौर पर इन दोनों के नेटवर्क से जुड़े होने और अलग-अलग शहरों में नकली नोटों की सप्लाई करने की जानकारी दी है। हालांकि, दोनों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।पुलिस अब दोनों की तलाश कर रही है। साथ ही दिल्ली के नरेला स्थित उस मकान और वहां इस्तेमाल किए गए लैपटॉप, प्रिंटर तथा अन्य उपकरणों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि नकली नोटों की सप्लाई किन शहरों में की गई और ऑनलाइन भुगतान या कूरियर के जरिए इस नेटवर्क को चलाया जा रहा था या नहीं।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
बुढ़ाना पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 178, 179, 180, 3(5) और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। बरामद नकली नोटों की जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।फिलहाल, तीन आरोपी गिरफ्तार हैं और दो अन्य लोगों के नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क ने कितनी नकली करेंसी तैयार की और अब तक कितनी रकम बाजार में खपाई गई।