बिहार के समस्तीपुर में नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं से लाखों रुपये ठगने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। चकमेहसी थाना पुलिस ने उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले मामले में एक साल से फरार आरोपी पवन ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने 53 लाख रुपये तक ठगी की थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी चकमेहसी थाना क्षेत्र के सैदपुर गांव निवासी नथुनी ठाकुर का पुत्र है। लंबे समय से फरार चल रहे पवन ठाकुर की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। गुप्त सूचना मिलने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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दिखाया बैंक में नौकरी दिलाने का सपना
मामले की शुरुआत तब हुई जब पूसा थाना क्षेत्र के सिमरी गोपाल गांव निवासी एक व्यक्ति ने पवन ठाकुर और तत्कालीन कृषि केंद्र कर्मी सोफिया खानम के खिलाफ FIR दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों ने उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कई अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूल की। बताया गया कि वर्ष 2022 में अभ्यर्थियों से प्रोसेसिंग फीस, ट्रेनिंग चार्ज, ट्यूशन फीस और अन्य खर्चों के नाम पर लाखों रुपये जमा कराए गए। युवाओं को विश्वास दिलाया गया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह वैध है और जल्द ही उन्हें नियुक्ति पत्र मिल जाएगा।
ऑनलाइन परीक्षा से लेकर बांटा फर्जी नियुक्ति पत्र
आरोपियों ने अभ्यर्थियों का भरोसा जीतने के लिए ऑनलाइन परीक्षा भी आयोजित कराई। इसके बाद दिसंबर 2023 में डाक के माध्यम से कथित नियुक्ति पत्र भेजे गए। नौकरी मिलने की खुशी में कई अभ्यर्थियों ने जश्न भी मनाया लेकिन उनका सपना ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका। छह जनवरी 2025 को जब अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र लेकर संबंधित कार्यालय पहुंचे तो उन्हें पता चला कि सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ और पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों ने अभ्यर्थियों से कुल करीब 53 लाख रुपये वसूले थे। मामला उजागर होने के बाद दबाव बढ़ने पर लगभग 10 लाख रुपये वापस किए गए लेकिन अब भी 40 लाख रुपये से अधिक की राशि बकाया है। पीड़ित लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
मुख्य आरोपी पहले ही जा चुकी है जेल
इस बहुचर्चित मामले में मुख्य आरोपी सोफिया खानम को पुलिस पहले ही 31 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जबकि पवन ठाकुर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क और ठगी में शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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चकमेहसी थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा युवाओं से वसूली गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान कई और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।