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IAS आरके सिंह गिरफ्तार, पंचकूला नगर निगम फंड घोटाले में CBI ने उठाया

पंचकूला नगर निगम के फंड घोटाले में सीबीआई ने आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं करनाल और चंडीगढ़ स्थित आवास पर दबिश देकर अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

IAS officer Ram Kumar Singh

आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पंचकूला नगर निगम घोटाले में बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में आईएएस अधिकारी आरके सिंह को गिरफ्तार किया गया है। चंडीगढ़ और करनाल स्थित उनके आवास पर छापेमारी भी की गई। दरअसल, चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की शाखा में पंचकूला नगर निगम का एक खाता खोला गया था। बाद में बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके लगभग 79.46 करोड़ का गबन किया गया था।

 

मामला संज्ञान में आने के बाद हरियाणा सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपी। सीबीआई को पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त और सीनियर अकाउंटेंट की भूमिका संदिग्ध मिली। पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद गुरुवार को सीबीआई ने आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह (आरके सिंह) को गिरफ्तार किया, क्योंकि उस वक्त राम कुमार सिंह ही पंचकूला नगर निगम के आयुक्त थे। वहीं सीनियर अकाउंटेट को केंद्रीय एजेंसी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।  

 

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अब तक 17 के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

सीबीआई छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन अधिकारी, दो कंपनियों और छह अन्य व्यक्तियों समेत 17 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि अधिकारियों ने मिलीभगत करके आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की सेक्टर-32 शाखा में फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट के माध्यम से सरकारी रकम को मुखौटा कंपनियों में भेजकर गबन को अंजाम दिया।

 

सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि चंडीगढ़ में पंचकूला नगर निगम के नाम पर खोला गया खाता हरियाणा के वित्त विभाग के नियमों का उल्लंघन करके खोला गया था। सीबीआई ने बताया कि खाते खोलते वक्त गलत जानकारियां भरी गईं, ताकि आगे चलकर भर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके।

 

आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों से सांठगांठ की। फिक्स्ड डिपॉजिट के नाम पर अपने मध्यस्थों के जरिए बैंक को कई हस्ताक्षरित चेक सौंपे। जांच में खुलासा हुआ कि बैंक में कोई एफडी खोली ही नहीं गई थी। उसकी जगह चेक से पैसा निकाला गया और मुखौटा कंपनियों में खपाया गया। इन कंपनियों का नियंत्रण आरोपी बैंक अधिकारियों के पास था। 

 

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आठ विभागों में 500 करोड़ से अधिका का घोटाला

हरियाणा के आठ विभागों में करीब 504 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। पंचूकला नगर निगम का घोटाला भी इसी में शामिल है। बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लगभग 79.46 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई है।

क्या है मामला?

इसी साल हरियाणा सरकार को अपने आठ विभागों में करीब 504 करोड़ रुपये के अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के माध्यम से फंड को शेल कंपनियों में भेजने के बारे में पता चला। 23 फरवरी को पंचकूला के हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामला दर्ज किया। पांच आईएएस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली।

 

इसके बाद जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई। 14 मई को सीबीआई ने पंचकूला और चंडीगढ़ में दबिश दी और अहम दस्तावेजों को कब्जे में लिया। जांच में सामने आया कि सेक्टर- 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में ही पंचकूला नगर निगम के लगभग 79.46 करोड़ रुपये का गबन किया गया। सीबीआई चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल), चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच में जुटी है।

 


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