कोई दिग्गज नेता या फिर डार्क हॉर्स? बिहार में CM के नाम पर माथापच्ची शुरू
होली के ठीक बाद बिहार की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अगर सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बन जाते हैं तो उसके बाद बिहार का अगला सीएम कौन होगा। अगले सीएम के दावेदार कौन हो सकते हैं, जान लीजिए।

Photo credit- Sora
होली के मौके पर पटना से दिल्ली और दिल्ली से पटना के बीच नेताओं की अचानक बढ़ी आवाजाही ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है कि क्या राज्य की राजनीति में एक बार फिर उलटफेर होने वाला है। इसी बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं के राज्यसभा नामांकन के बाद सियासी अटकलें और भी तेज हो गई हैं।
बिहार विधानसभा में एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित बीजेपी और जेडीयू के कई बड़े नेता मौजूद रहे। नामांकन के बाद सभी नेता विधानसभा से निकल गए, जबकि अमित शाह बीजेपी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के लिए स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए। इस बैठक को भी बिहार की सियासत में बढ़ते बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: 'दूल्हा नीतीश, फेरे किसी और के...', अब तेजस्वी यादव ने कसा तंज
बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी, नए समीकरण की तलाश
विधानसभा चुनाव 2025 के बाद बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी के 89 विधायक विधानसभा पहुंचे हैं। बिहार के लोग आज भी बड़ी संख्या में जाति के आधार पर वोट देते हैं, जिसके लिए पिछले चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले के जरिए सवर्ण, ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई थी।
पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से हटते हैं या राज्यसभा की राह पकड़ते हैं, तो बीजेपी पहली बार बिहार में अपने दम पर मुख्यमंत्री का चेहरा सामने ला सकती है। यह फैसला न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी अहम होगा।
जातीय गणित भी तय करेगा सीएम का चेहरा
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। विधानसभा में सवर्ण विधायकों की संख्या अच्छी-खासी मानी जा रही है। बीजेपी के टिकट पर लगभग 35 से 38 सवर्ण विधायक जीतकर आए हैं, जिनमें राजपूत, ब्राह्मण और भूमिहार समुदाय के नेता प्रमुख हैं।
वहीं ओबीसी और ईबीसी वर्ग के लगभग 32 से 35 विधायक भी सदन में पहुंचे हैं। पूरे सदन में राजपूत, यादव और ब्राह्मण विधायकों की संख्या प्रभावशाली है। इसके अलावा 25 कुर्मी, 23 कुशवाहा, 26 बनिया और 23 भूमिहार विधायक भी विधानसभा में हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा चुनना केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी सवाल बन गया है।
यह भी पढ़ें: 'आ जाओ लाश पड़ी है...', बीवी को कुल्हाड़ी से काट डाला, फिर खुद बुलाई पुलिस
सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार
नए सीएम की होड़ में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। कोइरी (कुशवाहा) समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी बीजेपी के आक्रामक ओबीसी चेहरों में गिने जाते हैं। नीतीश कुमार के खिलाफ उनकी आक्रामक राजनीतिक रणनीति और संगठन में मजबूत पकड़ ने उन्हें पार्टी के भीतर प्रभावशाली नेता बना दिया है। अगर बीजेपी ओबीसी कार्ड खेलती है तो सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।
नित्यानंद राय भी रेस में
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में है। यादव समुदाय से आने वाले राय को बीजेपी लालू यादव के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए आगे कर सकती है। अमित शाह के करीबी माने जाने वाले नित्यानंद राय का संगठन और केंद्र की राजनीति में मजबूत प्रभाव भी उनके पक्ष में जाता है।
यह भी पढ़ें: कहां, कैसे और कितने में मिलगी दिल्ली की डबल डेकर बस की टिकट?
दिलीप जायसवाल का नाम भी चर्चा में
मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी के दिलीप जायसवाल का नाम भी रेस में है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बनती है तो पार्टी कई विकल्पों पर विचार कर सकती है। दिलीप जायसवाल संगठन और सरकार दोनों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
विजय कुमार सिन्हा और रूडी का भी नाम
वर्तमान डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। भूमिहार समाज से आने वाले सिन्हा का विधानसभा में अनुभव और संगठन में प्रभाव उन्हें मजबूत विकल्प बनाता है। इसके अलावा सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी का नाम भी राजनीतिक हलकों में चर्चा में है। राजपूत समुदाय से आने वाले रूडी का लंबा राजनीतिक अनुभव है और राष्ट्रीय राजनीति में पहचान उन्हें भी दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।
यह भी पढ़ें: कहां, कैसे और कितने में मिलगी दिल्ली की डबल डेकर बस की टिकट?
‘डार्क हॉर्स’ से भी चौंका सकती है बीजेपी
हाल के वर्षों में बीजेपी ने कई राज्यों में चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी ने अपेक्षाकृत कम चर्चित चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंका दिया था। ऐसे में बिहार में भी किसी नए चेहरे को सामने लाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसमें रेणु देवी, जनक राम या फिर अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले किसी नेता का नाम अचानक सामने आ सकता है।
निशांत कुमार की सक्रियता भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाले निशांत की हालिया सक्रियता ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जेडीयू के कुछ नेताओं का संकेत है कि निशांत जल्द ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो किसी राजनीतिक समझौते के तहत उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, ताकि जेडीयू का पारंपरिक कुर्मी-कोइरी वोट बैंक मजबूत बना रहे है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



