भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी जसपाल राणा के निधन के महज चार दिन बाद उनकी मां श्यामा देवी राणा का भी निधन हो गया। 78 साल की श्यामा देवी ने मंगलवार सुबह नई दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। जसपाल राणा अपनी मां के इकलौते बेटे थे। पिछले कुछ दिनों से श्यामा देवी की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। बेटे के जाने के चार दिन बाद ही उन्होंने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्यामा देवी के निधन की जानकारी जसपाल राणा के रिश्तेदार दिनेश गौड़ ने दी। उन्होंने बताया कि 12 जून को जसपाल राणा के निधन के बाद से ही उनकी मां की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। हालत खराब होने पर उन्हें कुछ दिन पहले दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को इलाज के दौरान उन्होंने भी अंतिम सांस ले ली।
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जसपाल राणा का निधन कैसे हुआ?
भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल जसपाल राणा का निधन 12 जून को दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ था। जानकारी के अनुसार, जर्मनी से भारत लौटते समय फ्लाइट में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी। 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर जसपाल राणा का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के अनुसार, उन्होंने कई बार इच्छा जताई थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में किया जाए।
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जसपाल राणा का करियर
निशानेबाजी की दुनिया में जसपाल राणा का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। भले ही वह अपने करियर में ओलंपिक पदक नहीं जीत सके लेकिन उनकी उपलब्धियां किसी से कम नहीं रहीं। उन्होंने एशियाई खेलों में कुल 8 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।
इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में भी जसपाल राणा का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। उन्होंने कुल 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। जसपाल राणा ने एशियन चैंपियनशिप में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था।
साल 1994 में उन्होंने जूनियर विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। उनकी ये उपलब्धियां भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद की जाएंगी। एक और खास बात यह है कि वह ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के कोच भी रहे और उनकी सफलता में भी जसपाल राणा का अहम योगदान रहा।