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19 साल पहले पति, 12 साल पहले पत्नी की मौत, कोई और लेता रहा पेंशन

रेलवे से रिटायर्ड एक कर्मचारी के निधन के बाद उनकी पत्नी को पेंशन मिल रही थी। 2014 में पत्नी का निधन हो गया लेकिन अभी तक पेंशन के पैसे निकाले जा रहे थे।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Gemini

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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है। रेलवे में काम कर चुके एक शख्स की मौत साल 2007 में हो चुकी थी। उनकी पत्नी के नाम पर तब से ही पेंशन भी जारी हो रही थी। अब पता चला है कि यह पेंशन उनकी असली पत्नी नहीं, बल्कि कोई दूसरी महिला ले रही थी। पुलिस को इस मामले की जानकारी गुरुवार को मिली, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपी महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

 

रेलवे कर्मचारी धर्मेंद्र को नौकरी से रिटायर होने के बाद सरकारी पेंशन मिलती थी। रिटायरमेंट के कुछ साल बाद 28 अगस्त 2007 को धर्मेंद्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी प्रभावती देवी पेंशन लिया करती थीं। फिर प्रभावती देवी की भी 21 मार्च 2014 को मृत्यु हो गई। धर्मेंद्र की पत्नी की मृत्यु के बाद यह बैंक खाता बंद हो जाना चाहिए था लेकिन बैंक को औपचारिक रूप से यह सूचना ही नहीं दी गई कि प्रभावती देवी की मौत हो चुकी है। इसी वजह से प्रभावती बनकर आरोपी महिला यानी पार्वती देवी हर महीने पेंशन लेती रही।

 

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कौन हैं आरोपी पार्वती?

पुलिस के अनुसार, प्रभावती के परिजन को यह जानकारी थी कि प्रभावती को पेंशन मिलती थी। प्रभावती की मृत्यु के बाद उनके ही रिश्तेदारों ने एक साजिश रची। इस साजिश के तहत एक महिला यानी पार्वती देवी को प्रभावती बनवाकर बैंक से फर्जी तरीके से पेंशन के रुपये निकलवाए गए। यह पेंशन हर महीने बैंक से निकाली जाती रही। इन लोगों को बैंक खाते की पूरी जानकारी पहले से थी, इसी वजह से यह साजिश सफल हो पाई।

 

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पुलिस की जांच

थाने के एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह ने शुक्रवार को बताया कि इस मामले में शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया है।

 

भारतीय न्याय संहिता की धारा फर्जीवाड़े के मामलों में लगती है। इस धारा के तहत धोखाधड़ी करना या करवाना दोनों अपराध माने जाते हैं। इसमें धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी जैसे मामले शामिल होते हैं। यह मामला भी फर्जी तरीके से पेंशन लेने से जुड़ा है। यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो पार्वती देवी और अन्य लोगों को भारतीय न्याय संहिता के तहत सजा दी जाएगी। इस प्रकार के जालसाजी के मामलों में आरोपियों को 2 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।


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