logo

मूड

ट्रेंडिंग:

पंजाब से पहले चंडीगढ़ में होगा बीजेपी-अकाली गठबंधन? 5 साल से उलझी गुत्थी

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में ABVP और SOI की जीत के बाद अब बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन को लेकर चर्चा है। पंजाब से पहले चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में दोनों दल साथ आ सकते हैं।

Sukhbir Badal and PM Modi

पीएम मोदी और सुखबीर बादल, Photo Credit: Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब की राजनीति में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में ABVP और शिरोमणि अकाली दल के स्टूडेंट विंग SOI के गठबंधन की जीत के बाद इन चर्चाओं को ज्यादा बल मिला है। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे और दोनों ही दल इन चुनावों की तैयारियां कर रहे हैं। गठबंधन को लेकर बीजेपी का कहना है कि नहीं होगा लेकिन अकाली दल गठबंधन करना चाहता है। ऐसे में गठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती रहती है लेकिन पंजाब से पहले इस प्रश्न का जवाब कुछ महीने बाद होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में देना होगा। 

 

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है और यहां कोई विधानसभा नहीं है। एक सांसद और नगर निगम के चुने हुए प्रतिनिधि चंडीगढ़ को चलाते हैं। यहां पंजाब के वोटर बड़ी संख्या में हैं ऐसे में पंजाब के राजनीतिक दल नगर निगम चुनाव में सक्रिय रहते हैं। 2021 में हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधि चुने गए थे। उस समय इन सभी दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। 2020 में किसान कानूनों के कारण टूटे गठबंधन को क्या चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से पहले फिर से एक किया जा सकता है या फिर बीजेपी और अकाली दल फिर से अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। यह सवाल राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है। 

 

यह भी पढ़ें: राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की जगह लेने वाले गोविंद देव गिरी कौन हैं?

चंडीगढ़ में होंगे चुनाव

चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है लेकिन यहां दिल्ली की तरह विधानसभा नहीं है। चंडीगढ़ से एक सांसद का चयन होता है और इसके अलावा नगर निगम में प्रतिनिधि चुने जाते हैं। नगर निगम के लिए चंडीगढ़ में इसी साल के अंत तर संभवत नवंबर महीने में चुनाव हो सकते हैं। चंडीगढ़ नगर निगम में किसी भी राजनीतिक दल के लिए संख्या बल बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में अगर बीजेपी और अकाली दल के बीच स्थानीय स्तर पर कोई समझ बनती है तो इसका सीधा असर मेयर चुनाव, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर पड़ सकता है।

पिछले पांच साल से मुश्किल में बीजेपी

पिछले पांच साल से हर बार वोटिंग के समय भारतीय जनता पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है क्योंकि बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल के एक पार्षद भी बीजेपी के साथ आने के लिए तैयार नहीं हैं। वह हर बार वोटिंग से दूर रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया था और बीजेपी के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार दिए थे। इस चुनाव में बीजेपी के अनिल मसीह को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया और उन्होंने वोटों को अवैध तरीके से खराब कर बीजेपी उम्मीदवार को विजयी घोषित किया। इसके बाद राजनीतिक बवाल हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को विजेता घोषित किया। भले ही बीजेपी पांच साल में ज्यादातर बार अपना मेयर बनाने में सफल रही लेकिन हर बार राजनीतिक विवाद हुआ है। 

क्या गठबंधन से होगा फायदा?

शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी को इस गठंबधन से फायदा होगा क्योंकि दोनों का वोटबैंक अलग-अलग है। बीजेपी को हिंदू वोटर्स ज्यादा पसंद करते हैं, तो शिरोमणि अकाली दल को सिख वोटर्स का ज्यादा संख्या में मिलता है और इन दोनों के वोट ही शहर में सबसे ज्यादा हैं। ऐसे में दोनों दलों को गठबंधन से फायदा होगा। वहीं, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन नहीं कर सकते हैं और इसका सीधा फायदा बीजेपी-अकाली को मिल सकता है। 

 

यह भी पढ़ें: 'ये लोग ही बचे हैं बेरोजगार', GDP ग्रोथ पर सवाल उठाने वालों पर पीयूष गोयल का तंज

क्या चंडीगढ़ बनेगा टेस्टिंग ग्राउंड?

पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अकाली दल से स्टूडेंट विंग SOI ने वोटिंग से कुछ घंटे पहले ABVP को अपना समर्थन देकर पूरा खेल ही पलट दिया। गठबंधन के उम्मीदवार अंकित बिढान प्रधान पद पर जीत गए। इसके बाद अब पंजाब से पहले एक बार फिर चंडीगढ़ में गठबंधन का टेस्ट हो सकता है। चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव साथ लड़कर दोनों दल पंजाब में मैसेज देने की कोशिश कर सकते हैं और चुनाव से पहले एक छोटी जीत भी राज्य में बड़ा मैसेज दे सकती है।

 

बीजेपी किसी भी कीमत पर चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव नहीं हारना चाहेगी क्योंकि इससे पार्टी का पंजाब चुनाव को लेकर नैरेटिव खराब होगा। 2021 में आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ में अच्छा प्रदर्शन किया था और फिर पंजाब चुनाव में जमकर इसका प्रचार किया। ऐसा ही कुछ बीजेपी इस बार करने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला बीजेपी नेतृत्व को करना है जिसने फिलहाल नेताओं को सभी सीटों पर तैयारी के निर्देश दिए हैं। 

 


और पढ़ें