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'बीवी का अफेयर कहीं और हुआ तो वॉट्सऐप चैट भी सबूत होगा', हाई कोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मेंटेनेंस के एक मामले में पति की ओर से पेश की जा रही व्हाट्सएप चैट को सबूत मानने के लिए कहा है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: SORA

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की परमिशन दी है। कोर्ट ने इस संबंध में निचली अदालत को आदेश भी जारी कर दिए हैं। कोर्ट में एक पति ने अडल्ट्री के आधार पर अपनी पत्नी के मैंटेनेंस की मांग का विरोध कर रहे थे। इस मामले में कोर्ट ने व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर रिकॉर्ड पर इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। 

 

इस मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन पाल सिंह ने कहा कि निचली कोर्ट ने व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर इसलिए इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत सर्टिफिकेट नहीं दिया था। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 में यह प्रावधान है कि फैमिली कोर्ट किसी भी सबूत को स्वीकार कर सकता है अगर वह सबूत विवाद से निपटने में मदद कर सकता है। 

 

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व्हाट्सएप चैट को माना सबूत 

कोर्ट ने व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर माना और कहा कि फैमिली कोर्ट अधिनियम इसकी इजाजत देता है फिर चाहे यह सबूत भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत स्वीकार्य ना हो। कोर्ट ने कहा, 'निचली अदालत से पारित आदेश कानून की नजर में मान्य नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। इस मामले को निचली कोर्ट में फिर से विचार के लिए भेजा जाता है।'

 

कोर्ट ने कहा कि निचली कोर्ट को दोनों पक्षों को ऐसे सबूत पेश करने की अनुमति देनी होगी जो फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के तहत विवाद को असरदार तरीके से सुलझाने में कोर्ट की मदद कर सकें। इसके बाद कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए ट्रायल कोर्ट में भेज दिया है।  

ट्रायल कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को 10 हजार रुपये मेंटेनेंस के रूप में देने का निर्देश दिया था। हालांकि, पति ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौति दी और आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने उसकी इस दलील पर विचार नहीं किया कि उसकी पत्नी किसी दूसरे आदमी के साथ अडल्ट्री में रह रही थी। शादीशुदा होने के बावजूद किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहमति से यौन संबंध बनाने को अडल्ट्री कहा जाता है। 

 

महिला का पति अडल्ट्री के दावे को साबित करने के लिए व्हाट्सएप चैट को बतौर सबूत पेश करना चाहता था। अडल्ट्री कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के सेक्शन 125 के तहत मेंटेनेंस से इनकार करने का एक आधार है। इसी आधार पर पति महिला को मेंटनेंस देने से इनकार कर रहा था। पति का दावा है कि व्हाट्सएप चैट्स में उसकी पत्नी के साथ किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंधों का पता चलता है और चैट अश्लील प्रकृति की है। 

 

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ट्रायल कोर्ट ने अडल्ट्री के सबूत नहीं माने

जब महिला का पति हाई कोर्ट गया तो हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने ना तो इस पर विचार किया और ना ही अडल्ट्री को इस मामले कोई खास जगह दी है। कोर्ट ने कहा, 'खास दलीलों और सपोर्टिंग मटीरियल को देखते हुए, रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों पर विचार करने के बाद अडल्ट्री को इस केस में जोड़ा जाना चाहिए था और उस पर फैसला सुनाया जाना चाहिए था।' कोर्ट ने अब ट्रायल कोर्ट को इस मामले में अडल्ट्री को शामिल करने और सबूतों को पेश करने की इजाजत देने के आदेश दिए हैं। 

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