अवैध तरीके से चार लोगों को हिरासत में लेने के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को कुछ पुलिसकर्मियों को जमकर लताड़ा। पुलिसकर्मियों के जवाब सुनकर हाई कोर्ट ने उन्हें झूठों का झुंड तक कह दिया। इतना ही नहीं, जब अफसरों ने माफी की पेशकश की तो जजों ने कहा कि उन्हें कोर्ट ने नहीं जनता से माफी मांगनी चाहिए। काम में लापरवाही को लेकर हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी थाने का प्रभारी एक सामान्य सी जांच नहीं कर सकता तो वह कांस्टेबल बनने लायक भी नहीं है।
मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का है। आरोप है देवरिया के गौरी बाजार थाने की पुलिस ने चार लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में ले लिया। इस हिरासत के खिलाफ हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। इसी मामले में हाई कोर्ट ने जिले के एसपी से भी कई सवाल पूछे। इतना ही नहीं, हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि संबंधित SHO की सैलरी से पैसे काटकर याचिकाकर्ताओं को 65 हजार रुपये दिए जाएं।
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हाई कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
इस मामले में बुधवार को हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत ने सुनवाई की। उन्होंने पुलिसकर्मियों के रवैये, CCTV फुटेज को लेकर उनके जवाब और जांच में खामी को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की। दरअसल, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सिस्टम खराब था इसलिए 13 से 23 अप्रैल 2026 तक की फुटेज उपलब्ध नहीं है।
इससे पहले, हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जो अवैध हिरासत में लेने का दावा किया है उसकी पु्ष्टि के लिए CCTV फुटेज पेश की जाए। इस पर SHO ने बताया कि तकनीकी खामी के चलते फुटेज उपलब्ध नहीं है। जब हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या कि इस समस्या के बारे में जनरल डायरी में कोई एंट्री है? इसपर भी SHO ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी दर्ज नहीं है। जब इस बारे में जिले के एसपी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि CCTV खराब होने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
अफसरों को क्यों लताड़ा गया?
अफसरों की ओर से मिले जवाब पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और उन्हें 'झूठों का झुंड' कहा। इस पर जब एसपी ने कहा कि वह माफी मांगते हैं। हाई कोर्ट ने आगे कहा, 'लोगों से माफी मांगिए, कोर्ट से नहीं।' हाई कोर्ट ने एसपी से यह भी पूछा कि आखिर इसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? जस्टिस श्रीधरन ने पूछा, 'क्या आपने सस्पेंड किया, बर्खास्त किया? अगर थाने के SHO जनरल डायरी नहीं बना पा रहा है तो उसे बर्खास्त कर देना चाहिए। वह कांस्टेबल बनने लायक भी नहीं है।'
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हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से CCTV लगाना अनिवार्य किए जाने के बाद राज्य सरकार ने देवरिया के थानों में CCTV कैमरे लगाने के लिए 46 लाख रुपये जारी किए। हालांकि, एफिडेविट में यह नहीं बताया गया कि पैसे किस तारीख को जारी किए गए।