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बिहार: अब बस में ड्राइवर ने शराब पी या झपकी आई तो अलार्म बजाएगी AI डिवाइस

बिहार में परिवहन विभाग अनोखी पहल शुरू करने जा रहा है। अब लंबी दूरी के बसों में एक एआई डिवाइस लगाने का प्रस्ताव है। यह डिवाइस सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेगा।

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सांकेतिक फोटो। (AI Generated Image)

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संजय सिंह, पटना। सड़क दुर्घटना को रोकने के लिए परिवहन विभाग लंबी दूरी की बसों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) तकनीक से लैस नया डिवाइस लगाएगा। इस डिवाइस के लगने से चालकों को आसानी होगी। सड़क दुर्घटना में अमूमन 10 लोगों की मौत पूरे प्रदेश में रोज होती है। शराबबंदी के बाद दुर्घटनाओं में कमी आई है, लेकिन अब भी दुर्घटनाएं हो रही हैं। कभी-कभी चालकों को झपकी आने से भी दुर्घटनाएं होती है। कुछ लोग शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। यह भी देखा जाता है कि वाहन की गति अनियंत्रित होने कारण भी दुर्घटना हो जाती है, लेकिन अब चालक ऐसा नहीं कर पाएंगे।

शराब पीने पर गाड़ी नहीं होगी स्टार्ट

डिवाइस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अगर किसी चालक ने शराब पीकर गाड़ी चलाने की कोशिश की तो गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होगी। शराबबंदी के पहले शराब पीकर गाड़ी चलाने से कई गंभीर दुर्घटनाएं होती थी। दूसरे राज्यों में शराबबंदी नहीं है। परिणामस्वरूप लंबी दूरी के चालक दूसरे राज्यों में भी जाकर शराब नहीं पी पाएंगे। अगर शराब पीकर गाड़ी स्टार्ट करने का प्रयास किया गया तो गाड़ी स्टार्ट नहीं होगा। 

 

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झपकी आने पर भी अलर्ट करेगी डिवाइस

इस डिवाइस की दूसरी बड़ी विशेषता यह है कि चालक वाहन की गति निर्धारित सीमा से अधिक नहीं कर पाएगा। अगर ऐसा किया तो गाड़ी में अलार्म बजना शुरु हो जाएगा। इससे चालक और परिचालक के साथ साथ यात्री भी अलर्ट हो जाएंगे। इसी तरह वाहन चलाने के दौरान अगर चालक को झपकी आई तो यह मशीन अलग अलार्म बजाना शुरू कर देगी। यह डिवाइस कई मामले में उपयोगी है। 

 

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कितना खर्च आएगा इस डिवाइस को लगाने में 

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक बस में इस डिवाइस को लगाने में डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्च आएगा। परिवहन विभाग ने डिवाइस लगाने का प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद लंबी दूरी के बसों में इस डिवाइस को लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस तकनीक को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा में अपनाया गया है। वहां देखा गया कि तकनीक को अपनाए जाने के बाद दुर्घटना में कमी आई है।

 

 

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