पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल को राउड एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी केस में आपोरमुक्त कर दिया था। मगर, एक बार फिर से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल शुक्रवार को 'फांसी घर' केस में दिल्ली विधानसभा की प्रिविलेज कमेटी के सामने पेश होंगे। कमेटी को लिखे एक पत्र में केजरीवाल ने कहा कि वह शुक्रवार दोपहर 3 बजे पेश होंगे।
अपने पत्र में केजरीवाल ने लिखा, 'ऐसे समय में जब दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है, सड़कें खराब हालत में हैं, हर जगह कचरे का ढेर लगा है और अस्पतालों में दवाओं की कमी है, दिल्ली विधानसभा ने मुझे 'फांसी घर' पर सवालों के जवाब देने के लिए बुलाया है। मैंने प्रिविलेज कमेटी को बता दिया है कि मैं उनके समन के मुताबिक 6 मार्च को पेश होऊंगा। पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए समिति से मेरी विनती है कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए।'
सिसोदिया, राम निवास गोयल को भी नोटिस
विधानसभा कमेटी ने फांसी घर मामले में केजरीवाल के साथ में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला को नोटिस जारी किया है। आप की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इस पेशी को लेकर सरकार को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि अगर हिम्मत है तो इस कार्रवाई को लाइव स्ट्रीम किया जाए, ताकि जनता सच जान सके।
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प्रिविलेज कमेटी ने क्या कहा?
इससे पहले, प्रिविलेज कमेटी के चेयरमैन और बीजेपी विधायक प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने कहा था कि केजरीवाल ने 2 मार्च से 6 मार्च के बीच किसी भी दिन पेश होने की इच्छा जताई थी। इसी तरह, बाकी तीन नेताओं ने भी कुछ दिनों का समय मांगा था। इन आग्रह को ध्यान में रखते हुए और जांच में बेवजह की देरी से बचने के लिए, कमेटी ने 6 मार्च की आखिरी तारीख तय की है।
चेयरमैन प्रद्युम्न सिंह राजपूत के अलावा, कमेटी में सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रविकांत, राम सिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार सदस्य हैं।
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पूरा मामला क्या है?
बता दें कि यह मामला 9 अगस्त, 2022 को दिल्ली विधानसभा परिसर में बने कथित फांसी घर से जुड़ा है। इसके उद्घाटन और कानूनी मान्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद, दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने इस मामले को गंभीर बताया और इसे जांच के लिए प्रिविलेज कमेटी को भेज दिया। कमेटी को यह जांचने का निर्देश दिया गया कि क्या इसे बनाने और उद्घाटन से विधानसभा की गरिमा, नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है।