असम के कार्बी आंगलॉन्ग जिले के एक गांव में गांव वालों ने पति-पत्नी को सिर्फ इसलिए जला दिया, क्योंकि उन्हें शक था कि वे टोना-टोटका करते हैं। यह हैरान कर देने वाली घटना हावराघाट इलाके के बेलोगुड़ी मुंडा गांव में हुई। इस घटना पर अब पुलिस ने कार्रवाई की है और 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में जरूरी सबूत इकट्ठा करने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। गिरफ्तार लोगों में चार महिलाएं भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले पीड़ितों पर उनके घर के अंदर ही धारदार हथियारों से हमला किया। इसके बाद घर में आग लगा दी गई। आग की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान 43 साल के गार्दी बिरोवा और 33 साल की मीरा बिरोवा के रूप में हुई है। गांव वालों ने शक के आधार पर ही पति-पत्नी पर हमला किया और फिर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद उनके शवों को गांव वालों ने जला दिया था।
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जादू-टोने का था शक
स्थानीय लोगों का आरोप था कि दंपती टोना-टोटका करते थे और उनके कारण गांव और आसपास के इलाके में कई अप्रिय घटनाएं हो रही थीं। इसी अंदविश्वास के चलते गांव के कुछ लोगों ने कानून और पुलिस की परवाह किए बिना खौफनाक तरीके से दोनों को मौत के घाट उतार दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी और जांच शुरू कर दी थी। पुलिस ने इलाके को घेर लिया था और आरोपियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की कोशिश करने लगी थी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्यान संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया था।
20 आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस अधीक्षक पुष्पा राज सिंह ने इस घटना में हुई गिरफ्तारी के बारे में कहा, 'पुलिस ने इस घटना के बाद सबूत इकट्ठा कर इस क्राइम के सिलसिले में चार महिलाओं समेत 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।' उन्होंने बताया कि जिस गांव में यह घटना हुई है उसमें 150-200 लोग रहते हैं। पुलिस ने इस तरह के अपराध में शामिल लोगों का पता लगाया और 48 घंटों के भीतर 20 आरोपियों को पकड़ लिया। पुलिस ने यह भी कहा कि अभी इस मामले की जांच जारी है।
हत्त्या के बाद शव जलाए
इस मामले में पहले जानकारी सामने आ रही थी कि गांव वालों ने दोनों को जिंदा जलाया था लेकिन पुलिस जांच में पता चला है कि पहले दोनों की हत्या की गई। हत्या करने के बाद कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उनकी लाश को जला दिया गया। हावराघाट थाना प्रभारी सुंथोम श्याम ने कहा, 'पुलिस को भी शुरू में दोनों को जिंदा जलाने की जानकारी मिली थी लेकिन जांच में पता चला कि गांव के लोगों ने पहले दोनों की हत्या की और फिर शवों को जला दिया।'
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अपवाहों पर ध्यान ना देने की अपील
अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका अभी भी अंधविश्वास और अफवाहों के प्रभाव में है। लोग झूठी मान्यताओं पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। पुलिस ने बताया कि डायन प्रथा और चुड़ैल बताकर किसी को प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। असम में इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं और सरकार ने डायन प्रथा के खिलाफ सख्त कानून बना रखे हैं। सख्त कानूनों के बावजूद ऐसी घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। प्रशासन ने लोगों ने अपील की है कि वे अफवाहों और अंधविश्वास से दूर रहें और किसी भी शक या समस्या की जानकारी सीधे पुलिस को दें।