उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर संसद भवन परिसर में किए गए प्रदर्शन पर अब कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
राहुल गांधी
, अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद और बिहार के पूर्णिया से सांसद
राजेश रंजन
उर्फ पप्पू यादव के खिलाफ अदालत ने परिवाद दर्ज कर आगे की प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया है।
मामला 31 जुलाई को संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किए गए प्रतीकात्मक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने विपक्ष पर निशाना साधा था। अब इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर 31 जुलाई को संसद भवन परिसर में राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया था। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी ने इसे लेकर विपक्ष पर हमला बोला था। अब इसी प्रदर्शन को लेकर अयोध्या में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
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हिंदू महासभा के प्रवक्ता ने की थी शिकायत
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष कुमार पांडेय ने प्रदर्शन पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने 4 अगस्त को अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी। उनका आरोप था कि इस कृत्य से धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र दिया।
1 अक्टूबर को अदालत ने दिया आदेश
मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता वीरेंद्र शर्मा और शैलेंद्र त्रिपाठी के मुताबिक, अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वितीय की पीठासीन अधिकारी स्वर्णमाला ने एक अक्टूबर को आदेश पारित किया। अदालत ने प्रार्थना पत्र पर विचार करने के बाद मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। साथ ही गवाहों को पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले में 2 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। अदालत में शिकायत से जुड़े तथ्यों और गवाहों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया बढ़ेगी। हालांकि, परिवाद दर्ज करने का आदेश आरोपों को साबित करने या किसी को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। तीनों सांसदों के खिलाफ मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह अगली सुनवाई में स्पष्ट होगा।