अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद शुरू किया गया 10 दिन का प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान शुक्रवार शाम पूर्णाहुति के साथ समाप्त हो गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में देशभर से आए संतों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पूरे विधि-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना की गई।
अनुष्ठान के आखिरी दिन यज्ञशाला में हवन और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे। इस दौरान भगवान श्रीराम की आरती उतारी गई और सभी ने देश में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की।
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वैदिक विद्वानों की देखरेख में हुआ शुद्धीकरण
महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि पूरा कार्यक्रम वैदिक विद्वानों की निगरानी में चला। ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास और ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने यजमान बनकर आहुतियां दीं। इस अवसर पर स्थानीय ब्राह्मणों के लिए सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया गया।
70 वैदिक आचार्यों ने लिया हिस्सा
10 दिवसीय अनुष्ठान में अयोध्या समेत अन्य जगहों से करीब 70 वैदिक आचार्यों ने भाग लिया। उन्होंने वैदिक मंत्रों से हवन, रुद्राभिषेक और रामार्चा पूजा की। राम लला के मुख्य पुजारी ने पूरे समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। यह अनुष्ठान राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि के निर्देश पर कराया गया।
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क्यों शुद्धिकरण करना पड़ा?
महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि चोरी या पूजा में किसी गड़बड़ी की घटना के बाद मंदिर की पवित्रता बहाल करने के लिए परंपरा के अनुसार यह शुद्धिकरण अनुष्ठान किया जाता है। इस मामले में सरकार के आदेश पर एसआईटी जांच कर रही है और कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।