केरल के कोझिकोड में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से पी.के. साथियान के खाते से 10,000 रुपये कट गए लेकिन मशीन से कैश बाहर नहीं आया। बैंक ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया तो मामला डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन में पहुंचा। कमीशन ने बैंक को डेफिशिएंसी इन सर्विस और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस का दोषी मानते हुए 10,000 रुपये रिफंड और 5,000 रुपये मानसिक परेशानी के लिए यानी पूरे 15,000 रुपये देने का आदेश दिया।
यह मामला 28 जुलाई 2022 का है। कल्लई रोड पर स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में पी.के. साथियान अपने सेविंग्स अकाउंट से 10,000 रुपये निकालने गए थे। उन्होंने मशीन में ट्रांजैक्शन किया। उनके फोन पर अकाउंट से 10,000 रुपये कटने का मैसेज आ गया लेकिन मशीन से एक भी रुपया बाहर नहीं आया। इस घटना के तुरंत बाद ग्राहक ने बैंक से संपर्क किया। उन्होंने सबसे पहले 30 जुलाई 2022 को बैंक की चेरोटी रोड शाखा में एक रिटन कम्प्लेंट दी। इसके बाद भी जब पैसे वापस नहीं आए तो उन्होंने 12 अगस्त 2022 को कल्लई रोड शाखा में फिर से एक रिटन कम्प्लेंट दी। बैंक के ऑफिसर्स ने इस समस्या का कोई हल नहीं निकाला।
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बैंक की सफाई
कंज्यूमर कमीशन के सामने बैंक ने अपनी गलती मानने से मना कर दिया। बैंक ने कहा कि ग्राहक ने एटीएम से पैसे निकाल लिए थे। इस बात को साबित करने के लिए बैंक ने इलेक्ट्रॉनिक जर्नल स्टेटमेंट दिखाया। उसमें ट्रांजैक्शन सही दिखाया गया था। बैंक का कहना था कि सिस्टम के हिसाब से कैश निकल चुका है।
इस मामले की सुनवाई डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन की बेंच ने की। इसमें प्रेसिडेंट प्रिया एस. और मेंबर वी. बालकृष्णन शामिल थे। कमीशन ने 27 जुलाई को फैसला देते हुए बैंक की बात को गलत बताया। कमीशन ने साफ कहा कि सिर्फ कंप्यूटर रिपोर्ट पक्का सबूत नहीं है। एटीएम के अंदर लगे कैमरे की सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि पैसे मिले या नहीं लेकिन बैंक कोर्ट या कमीशन के सामने वह फुटेज नहीं दिखा पाया।
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कमीशन का आखिरी आदेश
कमीशन ने बैंक को निर्देश दिया कि वह ग्राहक के काटे गए 10,000 रुपये वापस करे। साथ ही परेशानी के लिए 5,000 रुपये हर्जाना दे। यह सारा पैसा फैसला आने के 30 दिनों के अंदर देना जरूरी है। अगर बैंक तय 30 दिनों के अंदर पैसे नहीं देता है तो उस रकम पर हर साल 9 परसेंट की रेट से एनुअल इंटरेस्ट भी चुकाना होगा।