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बांका सांसद के घर छापेमारी पर बवाल, SP बोले- खनन केस से कोई संबंध नहीं

बांका सांसद गिरधारी यादव के घर पुलिस की छापेमारी को लेकर विवाद बढ़ गया है। सांसद ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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बांका सांसद गिरधारी यादव, Photo Credit- Social Media

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बिहार के बांका सांसद गिरधारी यादव के घर पुलिस की छापेमारी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सांसद ने पुलिस की कार्रवाई को अपनी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा पर हमला बताया है। वहीं पुलिस ने सांसद के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि कार्रवाई अवैध मिट्टी खनन के मामले में की गई है। पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई का सांसद से कोई लेना-देना नहीं है। एक तरफ सांसद निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पुलिस इसे नियमित कानूनी प्रक्रिया बता रही है।

 

सांसद ने कहा कि अगर पुलिस को उनसे कोई पूछताछ करनी थी तो सीधे फोन किया जा सकता था। उन्होंने इस मामले को लेकर खुद एसपी को फोन किया लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने लेटर पैड के जरिए एसपी से मिलने का समय मांगा लेकिन उन्हें मिलने का समय भी नहीं दिया गया। सांसद ने एसपी का फोन रिसीव न किए जाने को गंभीर मुद्दा बताया।

 

सांसद ने कहा कि उनके खिलाफ या उनके परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। उनके खिलाफ 107 की कार्रवाई तक नहीं हुई है। फिर पुलिस किस आधार पर उनके घर पहुंची? गिरधारी यादव ने सवाल उठाया कि जब पुलिस किसी जनप्रतिनिधि के घर इस तरह पहुंच सकती है तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई से उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। सांसद के मुताबिक उनके पैतृक आवास पर जब पुलिस पहुंची तो उस समय घर में सिर्फ महिलाएं मौजूद थी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी वारंट या वैध आदेश के पुलिस किसी के घर पर इस तरह कैसे पहुंच सकती है। यह पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। जनप्रतिनिधि का घर भी आम नागरिक की तरह ही है वहां भी बिना कानूनी प्रक्रिया के पुलिस नहीं घुस सकती।

 

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देवघर में भी पहुंची पुलिस

सांसद ने दावा किया कि देवघर स्थित उनके आवास पर भी देर रात पुलिस पहुंची थी। उस समय घर में केवल महिलाएं मौजूद थीं। सांसद के अनुसार, पुलिसकर्मी पानी पीने के बहाने वहां पहुंचे थे। उन्होंने इस तरीके को आपत्तिजनक बताया। सांसद ने कहा कि उनका परिवार किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि से दूर रहा है और उनके परिवार की सामाजिक और राजनीतिक छवि भी साफ रही है।

 

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की शिकायत डीआईजी से की गई है और पुलिस की छापेमारी की जांच की मांग की गई है। सांसद ने कहा कि अगर बिहार पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार से उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह इस मामले को संसद में भी उठाएंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र और जनप्रतिनिधि के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।

 

प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने साल 2005 की एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय उन पर हमला हुआ था जिसमें उनके चालक की मौत हो गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी और उनकी जान बचाई गई थी। सांसद ने कहा कि उस समय पुलिस ने उनकी मदद की थी लेकिन अब बिना किसी वजह के उनके घर पर छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं और वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।

 

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एसपी ने आरोपों को गलत बताया

वहीं बांका एसपी अमितेश कुमार ने सांसद के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन से अवैध मिट्टी खनन के मामले में प्रिंस कंस्ट्रक्शन के संवेदक लालधारी यादव, ओंकार यादव और मुंशी के खिलाफ एफआई दर्ज है। इसी मामले में पुलिस ने छापेमारी की है। एसपी ने साफ कहा कि इस मामले का सांसद गिरधारी यादव से कोई लेना-देना नहीं है।

 

एसपी के अनुसार, अवैध खनन की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसी के तहत आरोपियों की तलाश में छापेमारी की गई। उन्होंने कहा कि अगर किसी जगह आरोपी के छिपे होने की जानकारी मिलती है तो पुलिस वहां जाकर जांच करती है। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। एक तरफ सांसद अपनी प्रतिष्ठा और जनप्रतिनिधि के अधिकारों की बात कर रहे हैं वहीं पुलिस इसे दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी सामान्य कार्रवाई बता रही है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि पुलिस ने किन आरोपियों की तलाश में छापेमारी की थी और पूरी कार्रवाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। डीआईजी की जांच के बाद मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।


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