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निर्मला सीतारमण का वीडियो दिखाकर ठगे 6.88 लाख रुपये, निवेश के नाम पर दिया झांसा

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक साइबर ठग ने डीपफेक का इस्तेमाल करके निर्मला सीतारमण का वीडियो बनाया और 66 साल के एक रिटायर्ड आदमी से 6.88 लाख रुपये ठग लिए।

representative image of Retired man and frauder

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में साइबर ठग ने AI और डीपफेक तकनीक का सहारा लेकर 66 साल के एक रिटायर्ड शख्स से 6.88 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का फर्जी वीडियो बनाकर उसे फेसबुक पर एक सरकारी निवेश योजना के प्रचार के तौर चलाया। बुजुर्ग ने वीडियो को असली समझा और उसमें पैसे निवेश कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि वह साइबर ठगों के जाल में फंस गए हैं।

 

नॉर्थ-ईस्ट साइबर क्राइम पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़ित नारायणपुरा का रहने वाला है। उसने फेसबुक पर एक वीडियो देखा, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त मंत्रालय और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के सहयोग से नई निवेश योजना शुरू की गई है। वीडियो में लोगों को कम समय में मोटा मुनाफा मिलने का दावा किया गया और सीमित सीटों का हवाला देकर जल्द निवेश करने के लिए कहा गया।

 

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कैसे शुरू हुई ठगी?

वीडियो के साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद बुजुर्ग ने अपनी KYC और अन्य निजी जानकारी दर्ज कर दी। इसके कुछ समय बाद उन्हें ब्रिटेन के कंट्री कोड (+44) वाले नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी योजना से जुड़ा प्रतिनिधि बताया और भरोसा दिलाया कि उनका निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

 

इसके बाद ठगों ने उन्हें 6 लाख रुपये से अधिक निवेश करने के लिए तैयार किया। उन्होंने दावा किया कि 10 दिनों के भीतर करीब 15 लाख रुपये का रिटर्न मिलेगा। भरोसा कर पीड़ित ने मार्च से जून के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 6.88 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब न पैसा वापस मिला और न ही कोई जवाब मिला, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

 

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पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है। इसी महीने बेंगलुरु में एक रिटायर्ड प्रोफेसर भी निर्मला सीतारमण के डीपफेक वीडियो के झांसे में आकर 61 लाख रुपये से अधिक गंवा चुकी हैं। उस मामले में साइबर ठगों ने पहले थोड़ी रकम वापस भेजकर भरोसा जीता और फिर टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए। इससे पहले 2025 में भी वित्त मंत्री के नाम से कई AI-जनरेटेड फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें कम समय में लाखों रुपये कमाने का झूठा दावा किया गया था। बाद में PIB फैक्ट चेक ने इन्हें पूरी तरह फर्जी बताया था।


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