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साइबर ठगी और पाकिस्तानी चैट का भंडाफोड़, 21 एटीएम कार्ड के साथ दो गिरफ्तार

बिहार के पश्चिम चंपारण में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से 21 एटीएम कार्ड और एक पाकिस्तानी व्हाट्सएप नंबर से चैट के सबूत मिले हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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बिहार के पश्चिम चंपारण के योगापट्टी थाना क्षेत्र में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छापेमारी करके 2 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को इनके पास से साइबर ठगी के कागजात और एक पाकिस्तानी व्हाट्सएप नंबर से हुई चैट के सबूत मिले हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की और दूसरे देशों से जुड़े संबंधों की अच्छे से जांच कर रही है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।

 

योगापट्टी के थानेदार ध्रुव कुमार सिंह को एक गुप्त सूचना मिली थी। सूचना यह थी कि कुछ लोग साइबर ठगों को बैंक खाते और एटीएम कार्ड देने का काम कर रहे हैं। इस बात का पता चलते ही पुलिस ने पिपरा नौरंगिया लोहरपट्टी गांव में छापा मारा और 2 लोगों को पकड़ लिया। पकड़े गए दोनों लोगों के नाम अफरोज अंसारी और अजय कुमार हैं। ये दोनों इसी गांव में रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में इन दोनों ने कई बड़े खुलासे किए हैं।

 

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21 एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से जो सामान बरामद किया उसमें अफरोज अंसारी के पास से 2 मोबाइल फोन और 4 एटीएम कार्ड मिले। वहीं अजय कुमार के पास से 2 मोबाइल फोन और 17 एटीएम कार्ड बरामद हुए। कुल मिलाकर पुलिस ने 4 मोबाइल फोन और 21 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। ये सभी एटीएम कार्ड अलग-अलग बैंकों के हैं और अलग-अलग जिलों से बनवाए गए हैं। पुलिस को शक है कि ये सभी कार्ड फर्जी कागजात से खोले गए खातों के हैं। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों से ठगी करके पैसे इधर-उधर भेजने के लिए करते थे।

 

जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें कई संदिग्ध चीजें मिलीं। फोन के अंदर साइबर ठगी से जुड़े कागजात, मैसेज और पैसों के लेनदेन का हिसाब था। सबसे बड़ी बात यह है कि एक फोन में पाकिस्तानी व्हाट्सएप नंबर से बातचीत होने के सबूत भी मिले हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि यह नंबर किसका है और चैट में क्या बातें हुई थीं। साइबर सेल की मदद से इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इस मामले का संबंध किसी बाहर के देश के गैंग से है।

कमीशन के लिए देते थे बैंक खाते

शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपियों ने यह मान लिया है कि वे साइबर ठगों के लिए काम करते थे। उनका मुख्य काम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाना और एटीएम कार्ड बनवाना था। इसके बाद वे ये एटीएम कार्ड और खाते साइबर ठगों तक पहुंचा देते थे। इस काम के बदले उन्हें हर खाते और कार्ड पर कमीशन मिलता था। साइबर ठग इन खातों में लोगों से ठगा गया पैसा मंगाते थे और फिर उसे तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। ऐसा करने से पुलिस और एजेंसियों के लिए ठगी के पैसों को ढूंढना बहुत मुश्किल हो जाता था।

 

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जांच में जुटी पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब इस गैंग के बाकी लोगों की तलाश कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि अब तक कुल कितने खाते खोले गए हैं, कितने लोगों के साथ ठगी हुई है और यह पैसा कहां-कहां भेजा गया है।

इस काम के लिए बैंक, फोन कंपनियों और साइबर सेल की मदद ली जा रही है ताकि पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब मिल सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि पाकिस्तानी नंबर से बातचीत क्यों की गई थी और क्या इस गैंग को बाहर से कोई पैसा मिल रहा था। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम चंपारण में ओटीपी, केवाईसी और लॉटरी के नाम पर ठगी के मामले बढ़ रहे थे जिस पर अब पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है।


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