बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज के प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी में भारी बारिश के कारण स्कूल परिसर में बहुत पानी भर गया था। स्कूल में पानी निकालने का कोई रास्ता नहीं था। इस दौरान शिक्षिका अफसाना परवीन ने बच्चों से ही स्कूल की बेंच उठवाकर पानी में रखवाई। इसके बाद वह खुद उसी बेंच पर चढ़कर स्कूल के अंदर पहुंचीं। बच्चों से बेंच उठवाना और उस पर बैठकर जाना वहां के लोगों और बच्चों के घर वालों को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और वे इस बात से बहुत नाराज हुए।
जब यह बात सोशल मीडिया पर लोगों को पता चली तो शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पर बहुत सख्ती दिखाई। उनके आदेश पर जिला शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षिकाओं, अफसाना परवीन और स्कूल की हेड टीचर नीलिमा पाठक को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। 17 जुलाई को दोनों शिक्षिकाओं ने अपना जवाब विभाग को सौंपा लेकिन जांच में यह पाया गया कि उनका जवाब सही नहीं था। जांच में यह साफ हो गया कि दोनों ने बहुत लापरवाही की है और सरकारी नियमों का पालन नहीं किया है।
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इसके बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत दोनों को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन के दौरान उनका काम करने का केंद्र फारबिसगंज का प्रखंड संसाधन केंद्र तय किया गया है और उन्हें नियमों के मुताबिक भत्ता मिलेगा। विभाग ने उनके खिलाफ आगे की विभागीय अनुशासनिक जांच भी शुरू कर दी है।
नियमों का उल्लंघन
शिक्षा विभाग ने कहा है कि स्कूल बच्चों को पढ़ाने के लिए होता है उनसे मजदूरी या इस तरह का काम कराने के लिए नहीं। बच्चों से ऐसा काम कराना शिक्षा के नियमों के खिलाफ है। विभाग ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्कूल में बच्चों के साथ गलत व्यवहार या उनसे पढ़ाई के अलावा कोई और काम कराना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना बच्चों के अधिकार और शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2011 के नियमों के खिलाफ है।
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गांव वालों की मांग
इस घटना के बाद से गांव के लोग और बच्चों के घरवाले काफी गुस्से में हैं। उनका कहना है कि स्कूल में पहले से ही सुविधाएं कम हैं और अब टीचर बच्चों से ऐसा काम करवा रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि स्कूल में पानी जमा होने की समस्या को हमेशा के लिए ठीक किया जाए ताकि बच्चों को आगे पढ़ने में कोई दिक्कत न हो। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को बोल दिया है कि बच्चों से कोई भी मेहनत वाला काम न कराया जाए और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। विभाग इस पूरे मामले की अभी और जांच कर रहा है।