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केन-बेतवा आंदोलनकारियों को मध्य प्रदेश पुलिस ने हटाया क्यों? पूरी कहानी

छतरपुर में केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में बैठे किसानों को पुलिस ने वहां से हटा दिया है। किसान नेता को हिरासत में लेने और प्रोजेक्ट में करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अब मामला गरमा गया है।

Jal Satyagraha

किसान जल सत्याग्रह, Photo Credit: Social Media

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मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर अपनी जमीन गंवा चुके आदिवासी किसान पिछले 14 दिनों से जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर बैठे थे। रविवार की सुबह पुलिस ने उस जगह पहुंचकर सभी प्रदर्शन करने वाले लोगों को वहां से हटा दिया। वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती गिरफ्तार किया है।

 

यह घटना छतरपुर जिले के ग्राम कुपी की है। वहां वरान नदी के पास एक पुल बनाने का काम चल रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना और दूसरे सरकारी कामों के चलते जिन किसानों की जमीन चली गई थी वे लोग अपनी जमीन के बदले में सही पैसा और रहने के लिए जगह की मांग कर रहे थे। किसान नेता अमित भटनागर की देखरेख में ये लोग 14 दिनों से वहां शांति से बैठे थे और भूख हड़ताल कर रहे थे।

 

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प्रशासन का क्या कहना है?

छतरपुर के बड़े पुलिस अधिकारी आदित्य पटले ने बताया कि पुलिस ने किसी भी किसान को न तो गिरफ्तार किया है और न ही कहीं बंद करके रखा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग पन्ना जिले के रहने वाले थे,  उन्हें बस में बैठाकर उनके घर भेज दिया गया है।

 

 

अमित भटनागर के बारे में अधिकारी ने बताया कि 14 दिन की भूख हड़ताल की वजह से उनकी तबीयत खराब हो रही थी। उनकी सेहत को कोई खतरा न हो,  उन्हें जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि जहां किसान बैठे थे वहां पुल बनाने का काम चल रहा है। किसी तरह की दुर्घटना न हो उन्हें वहां से हटाया गया है।

प्रदर्शन करने वाले लोगों के गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों में शामिल दिव्या अहिरवार ने एक वीडियो जारी किया है जो पुलिस की बात से बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि रविवार सुबह 5 बजे पुलिस की बड़ी टीम वहां पहुंची और सभी किसानों के साथ-साथ अमित भटनागर को भी गिरफ्तार कर लिया।

 

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दिव्या का यह भी कहना है कि अमित भटनागर आज ही इस परियोजना में हुए 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का बड़ा राज खोलने वाले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस पूरे मामले में हाथ है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने पन्ना और छतरपुर के अफसरों के साथ मिलकर इस आंदोलन को खत्म करने की योजना बनाई थी। दिव्या ने चेतावनी दी है कि अगर अमित भटनागर या किसी भी किसान को कुछ भी हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

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