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खुद को CID का DSP बताकर लोगों से करता था ठगी, खुद फरार; घर से मिले हथियार

फर्जी सीाईडी डीएसपी बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाला दारोगा मनोज वर्मा फरार है। पुलिस ने उसके घर से लाइसेंसी हथियार बरामद किए हैं और तलाश जारी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- ChatGPT

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बिहार में खुद को सीआईडी का डीएसपी बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाला दारोगा मनोज वर्मा अब भी पुलिस की पकड़ से फरार है। ठगी का शिकार हुई एक कैंसर पीड़िता महिला समेत कई लोगों ने भागलपुर और बांका में उसके खिलाफ केस दर्ज कराया है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। इसी दौरान मनोज के घर से लाइसेंसी हथियार भी बरामद हुए हैं। पुलिस हथियारों का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया में जुटी है जबकि सीनियर एसपी ने आरोपी की संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई जल्द शुरू करने की बात कही है।

 

मामले के अनुसार, वह बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर पटना में तैनात है। उसका काम डाक पहुंचाने का है लेकिन वह खुद को सीआईडी का डीएसपी बताकर लोगों को ठगता था। पीड़ितों का आरोप है कि वर्मा भागलपुर के कृषि कॉलेज, एनटीपीसी और पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर पैरवी करने की बात कहता था। इसके बदले वह महिलाओं और पुरुषों से मोटी रकम ले लेता था। ठगी का शिकार हुई सोनम भारती नाम की कैंसर पीड़िता महिला ने भी इशाकचक थाने में केस दर्ज कराया है। सोनम का कहना है कि मनोज ने उससे नौकरी के नाम पर लाखों रुपये ठगे।

 

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बांका-भागलपुर में दर्ज हैं कई केस

वर्मा के खिलाफ भागलपुर के इशाकचक और बाईपास थाने में केस दर्ज है। वहीं बांका थाने में भी पहले जीरो एफआईआर दर्ज हुई थी जिसे बाद में इशाकचक ट्रांसफर कर दिया गया। पीड़ितों की तरफ से केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मनोज ने दर्जनों लोगों को अपना शिकार बनाया है। केस दर्ज होने के बाद उसने कुछ लोगों का पैसा वापस भी किया है लेकिन वह खुद फरार चल रहा है।

 

पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए भागलपुर स्थित उसके घर पर छापेमारी की लेकिन वर्मा वहां भी नहीं मिला। तलाशी के दौरान उसके घर से लाइसेंसी हथियार बरामद हुए जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है। साथ ही हथियारों का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भागलपुर के सीनियर एसपी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि मामले में स्पेशल ब्रांच से भी सत्यापन कराया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनोज वर्मा सीआईडी का डीएसपी नहीं है बल्कि पटना में बिहार पुलिस में डाक पहुंचाने का काम करता है। फिलहाल वह पटना से भी फरार है। एसएसपी ने कहा कि पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है और उसकी संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

 

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नौकरी दिलाने की नाम पर करता था ठगी

पीड़ितों के अनुसार, मनोज वर्मा खुद को सीआईडी का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों में रौब जमाता था। वह कहता था कि उसकी कृषि कॉलेज, एनटीपीसी और पुलिस में अच्छी पकड़ है। नौकरी लगवाने के नाम पर वह पहले 50 हजार से 2 लाख रुपये तक लेता था। यहां तक की उसने कुछ लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी दे दिया था। जब लोग उससे पैसे वापस मांगते तो वह उन्हें धमकाता था। केस दर्ज होने के बाद दबाव में आकर उसने कुछ पीड़ितों को थोड़ा-थोड़ा पैसा लौटाया भी है लेकिन ज्यादातर लोग अब भी अपनी रकम के इंतजार में हैं।

 

पीड़ितों की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह ने भागलपुर के आईजी और एसएसपी से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ जल्द कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मनोज वर्मा ने महिलाओं, खासकर बीमार और मजबूर लोगों को भी नहीं बख्शा। कैंसर पीड़िता से भी उसने लाखों की ठगी की है। ऐसे व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस की कई टीमें मनोज वर्मा की तलाश में जुटी हैं। उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी के मोबाइल नंबर और बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि मनोज वर्मा के साथ इस ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


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