मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक डॉक्टर पर लगे रेप के आरोपों ने 40 दिन बाद एक नया मोड़ ले लिया है। ग्वालियर के रहने वाले डॉक्टर अम्बरीष सेंगर पर एक 30 साल की महिला ने नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था लेकिन अब इस मामले में हनीट्रैप का एंगल सामने आया है। अदालत में जब दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी तो मामला संदिग्ध नजर आया जिसके बाद कोर्ट ने डॉक्टर को अग्रिम जमानत दे दी है।
महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि डॉक्टर अम्बरीष उसे बेहतर इलाज का भरोसा दिलाकर ग्वालियर से भोपाल लेकर आए थे। 17 फरवरी को भोपाल पहुंचने के बाद महिला ने एमपी नगर थाने में डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि डॉक्टर उसे अस्पताल ले जाने के बजाय एक होटल में ले गए थे। महिला का कहना है कि उसे शुरुआत से ही डॉक्टर की नीयत पर शक हो रहा था, इसलिए उसने अपने पति को फोन करके भी इसकी जानकारी दी थी। महिला के मुताबिक, रात में डॉक्टर ने उसे दवा के नाम पर कुछ पिलाया जिससे वह बेहोश हो गई और अगली सुबह जब उसकी आंख खुली तो उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
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देरी से पुलिस रिपोर्ट की वजह
महिला ने अपनी एफआईआर में देरी की वजह बताते हुए कहा कि वह उस वक्त बदनामी और सामाजिक दबाव के कारण बहुत डरी हुई थी। इसी डर की वजह से उसने तुरंत पुलिस में शिकायत नहीं की और अपने पति के साथ वापस ग्वालियर लौट गई। महिला का दावा है कि जब डॉक्टर ने उससे दोबारा संपर्क करने की कोशिश की और उसे परेशान किया, तब उसने भोपाल आकर पुलिस को पूरी बात बताई और मामला दर्ज करवाया।
ब्लैकमेल भी किया गया
वहीं दूसरी तरफ आरोपी डॉक्टर अम्बरीष सेंगर ने अदालत के सामने खुद को बेगुनाह बताते हुए एक अलग ही कहानी पेश की। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने मसाज थेरेपी के लिए एक महिला से संपर्क किया था जिसने खुद को प्रोफेशनल थेरेपिस्ट बताया था। इसी सिलसिले में महिला ने उन्हें मिलने के लिए भोपाल बुलाया था। डॉक्टर का आरोप है कि होटल में महिला ने उन्हें एक ड्रिंक दी जिसे पीने के बाद वे बेहोश हो गए और जब उन्हें होश आया तो वे बिना कपड़ों के हालत में पड़े थे। इसके तुरंत बाद महिला और उसके साथियों ने उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और चुप रहने के बदले में पांच लाख रुपये और सोने के जेवरों की मांग की।
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कोर्ट का फैसला
अदालत में डॉक्टर के वकील ने कहा कि यह सब उन्हें फंसाने के लिए किया गया है। वकील के मुताबिक, डॉक्टर से पैसे वसूलने के लिए उन पर दबाव बनाया गया और जब बात नहीं बनी, तो रेप का झूठा केस दर्ज करा दिया गया। 18 मार्च को हुई सुनवाई में जज ने पूरी घटना के समय और कागजों को ध्यान से देखा। कोर्ट को लगा कि मामला संदिग्ध है और इसमें हनीट्रैप (फंसाने की साजिश) का शक है। इसी वजह से डॉक्टर को जमानत मिल गई। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या कोई गिरोह मिलकर लोगों को इस तरह फंसाने का काम कर रहा है।